प्रदेश की स्कूलों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान, मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रीय बाल आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया

प्रदेश की स्कूलों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान, मांगी रिपोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश की स्कूलों की इमारतों की बदहाल स्थिति और संसाधनों के अभाव को लेकर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश की स्कूलों की इमारतों की बदहाल स्थिति और संसाधनों के अभाव को लेकर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में शिक्षा मंत्रालय, बाल विकास मंत्रालय, मुख्य सचिव, एसीएस शिक्षा, प्रमुख बाल कल्याण सचिव और राष्ट्रीय बाल आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले को जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने के निर्देश देते हुए शिक्षा मंत्रालय और मुख्य सचिव से मामले में उठाए गए कदमों की जानकारी पेश करने को कहा है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकलपीठ ने यह आदेश प्रकरण में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स पर कार्रवाई करते हुए दिए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राष्टÑीय बाल आयोग की राजस्थान सहित एक दर्जन राज्यों की 26 हजार स्कूलों के सर्वे रिपोर्ट में आया है कि 22 फीसदी स्कूल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं और करीब 31 फीसदी स्कूलों की दीवारों में दरार आई हुई हैं। स्कूल वो जगह है, जहां भविष्य को आकार दिया जाता है। प्रभावी शिक्षण और सुरक्षित वातावरण इसकी जरूरी शर्त है। अदालत ने कहा कि बजट का 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च करने के बावजूद करीब 32 फीसदी स्कूलों में बिजली कनेक्शन ही नहीं है। शिक्षा विभाग के सूत्रों से पता चलता है कि 50 फीसदी से अधिक प्राथमिक स्कूल बिना बिजली के संचालित हो रहे हैं। 9 फीसदी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है और दस फीसदी बालिका स्कूलों में शौचालय का अभाव है। अदालत ने कहा कि स्कूलों में डिजिटल शिक्षण उपकरणों का भी अभाव है। केवल 57 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर हैं और 53 फीसदी में ही इंटरनेट कनेक्शन है। अदालत ने कहा कि समस्या केवल सरकारी स्कूलों तक ही सीमित नहीं है। निजी स्कूलों में भी जरूरी बुनियादी ढांचे की कमी है। प्रदेश में चालीस हजार स्कूलों पर दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुगम सुविधाएं नहीं होने के लिए जुर्माना लगाया गया है। आधे स्कूल जरूरी शारीरिक शिक्षा प्रदान नहीं करते। अदालत ने कहा कि पिछली राज्य सरकार ने 3737 हिंदी माध्यम स्कूलों को अंग्रेजी मीडियम में बदला, ताकि अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सकते। हालांकि इसके पांच साल बाद यह महत्वाकांक्षी पहल खराब बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी और विद्यार्थियों की रूचि में कमी के कारण असफ लता का सामना कर रही है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नजदीक में स्कूल होने का लक्ष्य प्राप्त करने में कई जिले अभी भी काफी दूर हैं। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। इसी बीच स्कूल की छत गिरने की घटना काफी हृदय विदारक है। अदालत ने कहा कि क्यों ना प्रत्येक स्कूल का व्यापक सर्वेक्षण किया जाए और आबादी के अनुपात में बच्चों के लिए पर्याप्त संख्या में स्कूल उपलब्ध हो। स्कूलों में पेयजल, शौचालय सहित छात्राओं के लिए मुफ्त सैनिटरी नैपकिन प्रदान किए जाए।

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