ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ देश की प्रतिबद्धता का दिया संदेश, भारत अब सिर्फ़ बयान जारी नहीं करता बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई भी करता है : राजनाथ सिंह

आतंकवाद पर भारत का निर्णायक प्रहार

ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ देश की प्रतिबद्धता का दिया संदेश, भारत अब सिर्फ़ बयान जारी नहीं करता बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई भी करता है : राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत की बदलती मानसिकता का वैश्विक संदेश दिया है। अब भारत कूटनीतिक बयानों के बजाय निर्णायक सैन्य कार्रवाई में विश्वास रखता है। रक्षा निर्यात में 62% की रिकॉर्ड वृद्धि और एआई (AI) आधारित युद्धक प्रणालियाँ नए और सशक्त भारत की पहचान बन चुकी हैं।

नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अपने भूभाग पर आतंकवादी हमलों के बाद अब केवल कूटनीतिक बयान जारी करने की पुरानी मानसिकता तक सीमित नहीं है बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां एक राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद का कोई भी कृत्य सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमलों और ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ सरकार के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा, "आतंकवाद एक विकृत और विक्षिप्त मानसिकता से उत्पन्न होता है। यह मानवता पर एक काला धब्बा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है, यह मूल रूप से मानवता के मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। यह एक बर्बर विचारधारा के खिलाफ संघर्ष है जो हर मानवीय मूल्य के सीधे विरोध में खड़ी है। हमने इस भारतीय दृष्टिकोण को देश के भीतर और विदेशों में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।"

रक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक आतंकवाद मौजूद रहेगा, यह सामूहिक शांति, विकास और समृद्धि को चुनौती देता रहेगा। उन्होंने कहा, "आतंकवाद को धार्मिक रंग देकर या इसे नक्सलवाद जैसी हिंसक विचारधारा से जोड़कर उचित ठहराने के प्रयास किए जाते हैं। यह अत्यंत खतरनाक है और एक प्रकार से आतंकवादियों को आड़ प्रदान करता है ताकि वे धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकें। आतंकवाद केवल राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, इसके कई आयाम हैं—संचालनात्मक, वैचारिक और राजनीतिक। इससे तभी निपटा जा सकता है जब हम इन सभी आयामों पर काम करें।"

पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने पर श्री सिंह ने कहा, "भारत और पाकिस्तान दोनों ने एक ही समय पर स्वतंत्रता प्राप्त की थी। हालांकि आज भारत को विश्व स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान को एक अलग प्रकार के आईटी यानी 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' का केंद्र माना जाता है।" रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सशस्त्र बलों की एकजुटता और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना ने एकजुट होकर और एकीकृत योजना के तहत कार्य किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत की सैन्य शक्ति अब अलग-अलग हिस्सों में काम नहीं करती, बल्कि यह एक संयुक्त, एकीकृत और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरी है।

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राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों पर और अपने चुने हुए समय पर अंजाम दिया, और इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर ही रोका। उन्होंने कहा, "इस अभियान के दौरान हमने अत्यंत सटीकता के साथ केवल उन लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने हमारे खिलाफ हमला किया था। हमने अभियान इसलिए नहीं रोका कि हमारी क्षमताएं समाप्त हो गई थीं या कम हो गई थीं। हमने इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर समाप्त किया। हम लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार थे। हमारे पास आवश्यक अतिरिक्त क्षमता और अचानक संकट के समय अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की अंतर्निहित शक्ति है।"

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रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का सैन्य-औद्योगिक ढांचा लगातार यह साबित करता रहा है कि वह न केवल शांति काल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है, बल्कि युद्ध के समय तेज आपूर्ति और रसद की मांगों को भी पूरा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि उस अवधि के दौरान भारत ने परमाणु हमले की धमकी या दबाव में आए बिना अपने निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया। उन्होंने कहा, "यह नई विश्व व्यवस्था है, यह नए वैश्विक युग का नया भारत है। यह वह भारत है जो आतंकवाद और उसे प्रायोजित करने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करता। यह हमारे प्रधानमंत्री की स्पष्ट नीति है, जिसने बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को रूपांतरित किया है।"

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रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोधक क्षमता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यद्यपि यह अभियान केवल 72 घंटों के भीतर समाप्त हो गया, लेकिन इसके पहले की तैयारी व्यापक और लंबी थी। उन्होंने बताया कि भारत की अतिरिक्त क्षमता, संसाधनों को तेजी से जुटाने की क्षमता, रणनीतिक भंडार और स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों की सिद्ध विश्वसनीयता अब प्रतिरोधक नीति के अभिन्न अंग बन चुके हैं।राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के परिणामस्वरूप वैश्विक धारणा में उल्लेखनीय बदलाव और स्वदेशी हथियारों तथा रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा ,"कई देशों ने भारत से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। 

आंकड़े स्वयं इसकी पुष्टि करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। हम इन मानकों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" जर्मनी की अपनी हाल की यात्रा पर रक्षा मंत्री ने कहा कि यूरोप की प्रमुख कंपनियां हमारे निजी रक्षा उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जो भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विश्व में भारत की मजबूत स्थिति केवल उसकी सैन्य शक्ति से ही नहीं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता स्थापित करने की योग्यता से भी सुदृढ़ हुई है।

प्रतिरोधक क्षमता के स्वरूप में तेजी से हो रहे बदलाव को रेखांकित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष युद्ध और सूचना प्रौद्योगिकी इसके महत्वपूर्ण घटक बन गए हैं, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इस परिवर्तन के केंद्र में है। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उपयोग की गई ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर विभिन्न निगरानी प्लेटफार्मों तक, एआई का व्यापक और प्रभावी उपयोग किया गया है। इससे हमारी सटीकता और प्रहार क्षमता में वृद्धि हुई है। जहां बड़ी कार्रवाइयों की जानकारी अक्सर सार्वजनिक हो जाती है, वहीं अनगिनत छोटे अभियान और प्रक्रियाएं पहले से सक्रिय होकर खतरों को उत्पन्न होने से पहले ही निष्प्रभावी कर देती हैं। ऐसे सभी मामलों में एआई का व्यापक उपयोग किया जाता है ।"

एआई के व्यावहारिक उपयोग पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह आतंकवादियों का पता लगाने और निर्णायक प्रतिक्रिया देने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "एआई का एक अर्थ 'ऑगमेंटेड इन्फैंट्री' भी है। यह हमारे सैनिकों की क्षमताओं को काफी बढ़ा रहा है। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हम अपनी सेना को तकनीक-आधारित, एकीकृत युद्ध मशीन में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस उद्देश्य से सेना ने 'रुद्र' ब्रिगेड, 'भैरव' बटालियन, 'शक्तिबाण' तोपखाना रेजिमेंट और 'दिव्यास्त्र' बैटरियों जैसे चुस्त और आत्मनिर्भर युद्धक इकाइयों की स्थापना की है, जो आधुनिक मिश्रित खतरों का तुरंत और सशक्त जवाब देने में सक्षम हैं।"
हालांकि, श्री सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई को केवल सकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि डीपफेक, साइबर युद्ध और स्वायत्त हथियार प्रणालियां नए और गंभीर खतरे उत्पन्न कर रही हैं। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डॉ. समीर वी. कामत और एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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