आर्थिक अपराध के मामले में हाईकोर्ट की सख्ती, हाइड्रोपॉनिक गांजे के तस्कर को जमानत देने से इनकार
लंबे समय से जेल में बंद है
गांजा की वाणिज्यिक मात्रा 20 किलो से कम है। एनडीपीएस कानून में मादक पदार्थ की कीमत से केस पर कोई असर नहीं होता। इसके अलावा वह लंबे समय से जेल में बंद है।
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने आर्थिक अपराध के मामले में सख्ती दिखाते हुए सामान्य गांजे की आड़ में विशेष तकनीक से तैयार हाइड्रोपॉनिक गांजे की तस्करी करने वाले आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालने के लिए सोच-समझकर किए जाने वाले अपराधों पर सख्ती दिखाने की आवश्यकता है। ऐसे में आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश कुलदीप सिंह की जमानत याचिका को खारिज करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि निजी हित में सफेद पोश अपराधों को अंजाम देकर अर्थव्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाने की जरूरत है। जमानत याचिका में कहा गया कि उसे बैंकाक से हाइड्रोपॉनिक गांजा लाते हुए एयरपोर्ट पर पकड़ा गया था। याचिकाकर्ता 21 वर्षीय युवक है और उसके पास 15 किलो 740 ग्राम गांजा जब्त हुआ। जबकि गांजा की वाणिज्यिक मात्रा 20 किलो से कम है। एनडीपीएस कानून में मादक पदार्थ की कीमत से केस पर कोई असर नहीं होता। इसके अलावा वह लंबे समय से जेल में बंद है।
इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाए। जिसका विरोध करते हुए केन्द्र सरकार की ओर से अधिवक्ता किंशुक जैन ने कहा कि याचिकाकर्ता एयरपोर्ट से हाइड्रोपॉनिक गांजा लेकर निकल रहा था। जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत साढ़े पंद्रह करोड़ रुपए है। इसके अलावा यह हाइड्रोपॉनिक गांजा, सामान्य गांजे से 10 गुणा से अधिक प्रभावी होता है। इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि वह कितनी बार विदेश यात्रा पर गया और किसी गिरोह का हिस्सा तो नहीं है। इसलिए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

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