महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने किया कांग्रेस में वापसी का ऐलान
महेंद्रजीत सिंह मालवीय की कांग्रेस में घर वापसी
दिग्गज आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय भाजपा छोड़ पुनः कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। उन्होंने डोटासरा और रंधावा की मौजूदगी में कहा कि उनका मन हमेशा कांग्रेस में ही रहा।
जयपुर: लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दिग्गज आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने फिर से कांग्रेस में वापस लौटने का ऐलान किया है। मालवीय ने रविवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ बैठक की। इस दौरान उनके साथ कांग्रेस विधायक अर्जुन बामनिया व रमिला खड़िया भी मौजूद रहीं।
मालवीय ने नेताओं के साथ बैठक में कहा कि उनके क्षेत्र के कार्यकर्ता व जनता कांग्रेस को ही स्वीकार करती है। मालवीय ने कहा कि हम भाजपा में तो गए थे, लेकिन मन कांग्रेस में ही रहा। हम कांग्रेसी थे, हैं और रहेंगे। एससी, एसटी, ओबीसी व माइनॉरिटी वर्गों को कांग्रेस ही सही मायने में प्रतिनिधित्व देती है। उन्होंने हरदेव जोशी व मोहनलाल सुखाड़िया जैसे नेताओं का उदाहरण दिया जो उनके क्षेत्र से मुख्यमंत्री बने। डोटासरा ने स्वागत करते हुए कहा कि मालवीय का अनुभव खासकर आदिवासी बेल्ट में कांग्रेस को मजबूत करेगा। मालवीय ने बीएपी को ऐसा बुलबुला बताया जो कभी सत्ता में नहीं आ सकती।
मालवीय ने कहा कि विकास सत्ता में होने वाला ही कर सकता है। गरीब इलाके को सरकार की जरूरत है, बीएपी से लोग दुखी हैं। उन्होंने कहा कि अन्य भाजपा में गए नेताओं की वापसी उनकी इच्छा पर निर्भर, लेकिन वे तो कांग्रेस में ही रहेंगे। कांग्रेस में वापसी के साथ ही मालवीय ने तीन राज्यों राजस्थान, गुजरात व मध्य प्रदेश के आदिवासियों का बड़ा सम्मेलन आयोजित करने का ऐलान किया। इसका मुख्य मुद्दा मोदी सरकार की मनरेगा नीति पर होगा। मालवीय ने कहा कि जिला प्रमुख रहते 3 लाख मजदूर काम करते थे। पंचायत राज मंत्री के समय 56 लाख थे, अब दयनीय स्थिति है।
बांसवाड़ा में रोज 3 करोड़ रुपये मजदूरों के हाथ जाते थे, अब दो-दो साल से भुगतान नहीं हुआ। वे इस महीने ही बड़ी रैलियां करेंगे। कांग्रेस का 10 जनवरी से शुरू हुए मनरेगा बचाओ संग्राम में मालवीय की भूमिका अहम होगी। गौरतलब है कि मालवीय राजस्थान के आदिवासी समाज के प्रमुख चेहरे हैं। वे बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके हैं और 1998 में बांसवाड़ा से सांसद भी चुने गए। गहलोत सरकार में जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने वागड़ क्षेत्र के विकास में योगदान दिया।
2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बागीदौरा से भारी मतों से जीत हासिल की, लेकिन लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष का पद न मिलने से नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया, लेकिन वे भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के राजकुमार रोत से करीब ढाई लाख वोटों से हार गए। विधायकी भी उपचुनाव में खो दी।

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