मोटर दुर्घटना के मुआवजे से जुडे़ मामले में अधिकारियों को निर्देश, हाईकोर्ट ने कहा- दिहाड़ी मजदूर की महीने की आय की गणना 26 नहीं 30 दिनों की मानी जानी चाहिए
सरकार को भी भेजने का निर्देश दिया
हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना के मुआवजे से जुडे़ मामले में कहा कि दिहाड़ी मजदूर की महीने की आय 26 दिनों के बजाय 30 दिनों की मानी जानी चाहिए।अदालत ने अफसरों को 26 दिनों के बजाय 30 दिनों की मजदूरी की गणना करने का निर्देश दिया है, जिससे संबंधित पक्षकारों को सही मुआवजा मिल सके।
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना के मुआवजे से जुडे़ मामले में कहा कि दिहाड़ी मजदूर की महीने की आय 26 दिनों के बजाय 30 दिनों की मानी जानी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने अफसरों को 26 दिनों के बजाय 30 दिनों की मजदूरी की गणना करने का निर्देश दिया है, जिससे संबंधित पक्षकारों को सही मुआवजा मिल सके।
सरकार को भी भेजने का निर्देश दिया
अदालत ने आदेश की कॉपी केन्द्र सरकार के श्रम मंत्रालय सचिव, श्रम विभाग व राज्य सरकार को भी भेजने का निर्देश दिया है, ताकि वे दिहाड़ी मजदूरों को महीने में 26 दिन के बजाय 30 दिन की न्यूनतम मजदूरी देने के अपने नोटिफिकेशन को बदलने के लिए कदम उठाए। जस्टिस अनूप कुमार यह आदेश लक्ष्मण कुमावत की अपील को मंजूर करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि प्रार्थी मुआवजे के तौर पर 33040 रुपए की अतिरिक्त राशि और प्राप्त करने का हकदार है। ऐसे में मामले से जुड़े संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया जाता है कि वे मजदूरी की पुन: गणना कर बढ़ी हुई राशि दो महीने में प्रार्थी को याचिका दायर करने की तारीख से 6 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करें।
एमएसीटी कोर्ट में मुआवजे के लिए परिवाद पेश किया
अपील में अधिवक्ता राहुल सिंह ने कहा कि अपीलार्थी 27 अगस्त, 2020 को मोटर साइकिल से जा रहा था। इतने में दूसरी तरफ से वाहन ने आकर उसे टक्कर मार दी। जिससे उसके गंभीर चोटें आई। इस पर अपीलार्थी की ओर से स्थानीय एमएसीटी कोर्ट में मुआवजे के लिए परिवाद पेश किया गया। जिस पर फैसला देते हुए अधिकरण ने मुआवजे की गणना के लिए न्यूनतम मजदूरी की गणना 26 दिनों से की। जबकि दैनिक मजदूर को माह में 30 दिन काम करने वाला माना जाता है। इसलिए मुआवजे की गणना तीस दिन मजदूरी के आधार पर किया जाए। जिसका विरोध करते हुए बीमा कंपनी की ओर से कहा गया कि श्रम मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार मजदूर माह में 26 दिन ही काम करते हैं। ऐसे में अधिकरण ने अपने आदेश में कोई गलती नहीं की है। इसलिए अपील को खारिज किया जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मजदूरी की गणना तीस दिन के आधार पर करने को कहा है।

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