तंबाकू निषेध दिवस आज : तंबाकू का सेवन मानव शरीर के लिए ही नही, पर्यावरण के लिए भी है कैंसर

तंबाकू उत्पादों में होते हैं सात हजार से ज्यादा विषैले रसायन

 तंबाकू निषेध दिवस  आज : तंबाकू का सेवन मानव शरीर के लिए ही नही, पर्यावरण के लिए भी है कैंसर

तंबाकू उत्पादों के सेवन से देशभर में करीब 13 लाख लोग अकारण ही मौत के शिकार होते हैं। राजस्थान में करीब 65 हजार लोगों की मौत होती है। तंबाकू के सेवन से मुंह, फेफड़े, हार्ट और गले का कैंसर होता है।

अक्सर हम सब सोचते हैं कि बीड़ी, सिगरेट, पान, गुटखा सहित धूम्रपान उत्पादों के सेवन से कैंसर हो सकता है, लेकिन ये उत्पाद हमारे पर्यावरण के लिए भी कैंसर बन रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि उपभोग के बाद इनके रैपर को खुले में फैक दिया जाता है। कुछ ही समय बाद ये सब नालियों में जमा हो जाते हैं। इससे नालियां भी अवरुद्ध होती है और इसके विषैले पदार्थ मिट्टी में या उसके माध्यम से भूमिगत पानी में भी चले जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि तंबाकू उत्पादों में 7 हजार से अधिक विषैले रसायन होते हैं, जो ना केवल मानव स्वास्थ्य, बल्कि पर्यावरण पर भी बड़े खतरे के रूप में उभर रहे हैं ।

सवाई मानसिंह अस्पताल के कान-नाक और गला विभाग के आचार्य डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि सिगरेट, बिड़ी के टुकड़े, लोगों द्वारा पान सुपारी, गुटखे की पीक जमीन पर थूकने से जमीन का पानी विषैला हो रहा है। सिगरेट के बट में प्लास्टिक होता है जो कभी गलता नहीं है। सिगरेट बट को बनाने वाले पदार्थ सेल्यूलोज एसीटेट, पेपर और रेयॉन के साथ मिलकर पानी और जमीन को भी प्रदूषित और विषेला बना रहे हैं। 

तंबाकू कैंसर का बड़ा कारण

तंबाकू उत्पादों के सेवन से देशभर में करीब 13 लाख लोग अकारण ही मौत के शिकार होते हैं। राजस्थान में करीब 65 हजार लोगों की मौत होती है। तंबाकू के सेवन से मुंह, फेफड़े, हार्ट और गले का कैंसर होता है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2017 के अनुसार राजस्थान में वर्तमान में 24.7 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का उपयोग करते हैं। इसमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान के रूप में सेवन करते हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष, 3.7 प्रतिशत महिलाएं हैं। इनमें से 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू का प्रयोग करते हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष व 5.8 प्रतिशत महिलाएं है।

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नारायणा मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल जयपुर के कंसल्टेंट ईएनटी, हैड एंड नेक सर्जरी डॉ. दीपांशु गुरनानी ने बताया कि हर साल करीब 2 लाख हेड एवं नेक कैंसर से जुड़े मामले आते हैं, जिसमें से करीब 95 प्रतिशत मामले तंबाकू सेवन के हैं। युवाओं में तंबाकू सेवन को बढ़ावा देने का मुख्य कारण सोशल मीडिया और प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा किए विज्ञापन हैं। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित स्वामी का कहना है कि सैकण्ड हैण्ड स्मोकिंग भी धूम्रपान करने जितना ही खतरनाक है, क्यूंकि ये सीधा फेफड़ों पर असर डालता है, जिससे कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए धूम्रपान और निष्क्रिय धूम्रपान से बचें। आजकल तंबाकू छोड़ने के लिए दवाइयां और निकोटिन थेरेपी भी उपलब्ध हैं।

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कैंसर का उपचार संभव

मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर की रेडिएशन ओन्कोलोजिस्ट डॉ. पूनम गोयल ने बताया कि तम्बाकू को किसी भी रूप व मात्रा में लेना घातक है। आज के युग में समय रहते पता लगने पर कैंसर का उपचार संभव है। कैंसर के मुख्य लक्षणों की बात करे तो सांस फूलना, भूख नहीं लगना, मूंह से खून आना, वजन कम होना, छाती में दर्द होना आदि है। इन सबको महसूस होते ही अच्छे चिकित्सक की सलाह लेकर तुरंत उपचार करवाना चाहिए। निम्स के मनोचिकित्सक डॉ. तुषार जग्गावत ने बताया कि धूम्रपान के मनोवैज्ञानिक पहलू भी हैं। कुछ लोगों के लिए धूम्रपान एक मजा है और यह उन्हें मनोवैज्ञानिक आनंद देता है साथ ही यह आत्म अभिव्यक्ति की एक कला है। कई लोगों के लिए, यह काम के दौरान आराम करने के लिए और खुशी के क्षण को जीने का एक बहाना है। बिहेवियरल थेरेपी और फार्माकोलॉजिकल थैरेपी दोनों उपचारों को मिलाकर उपचार करने पर तम्बाके छोड़ने की सफलता दर अधिक होती है।

 

 

 

 

 

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