राज्य बजट पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की प्रतिक्रिया, कहा- नीरस बजट में कुछ नहीं मिला, पुरानी घोषणाएं ही पूरी नहीं कर पाए
सरकार के निर्णय की वजह से लोग सुसाइड कर रहे
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे नीरस और संवेदनहीन बताया और प्रदेश को कुछ नहीं मिलने का दावा किया। विधानसभा में मीडिया से बातचीत करते हुए जूली ने कहा कि बजट बिल्कुल नीरस था। यह बजट बहुत संकीर्ण संवेदनहीन और नीरस बजट।
जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे नीरस और संवेदनहीन बताया और प्रदेश को कुछ नहीं मिलने का दावा किया। विधानसभा में मीडिया से बातचीत करते हुए जूली ने कहा कि बजट बिल्कुल नीरस था। यह बजट बहुत संकीर्ण संवेदनहीन और नीरस बजट है। जो काम हमारे से कांग्रेस सरकार ने किया वह आपको नजर नहीं आ रहे हैं। स्कूलों को बंद करने काम किया, उनका नाम बदलने का काम किया। सिर्फ शब्दों से काम नहीं चलता काम करके भी दिखाना पड़ता है। इन्होंने जादू के पिटारे की बात कही है। अभी जो नया पिटारा लेकर के आए हैं, कौन सा जादू का पिटारा खुलेगा मैं यह बात पूछना चाहता हूं। अब तक इन्होंने 2718 बजट घोषणाएं की है जिन में से 20 प्रतिशत घोषणा पूरी हुई है और 30 प्रतिशत घोषणा इनके शुरू भी नहीं हुई है जो बाकी 40 परसेंट के आसपास है वह अभी शुरू हुई है। अबकी बार रिफाइनरी का जिक्र नहीं किया जिसकी बजट में घोषणा की थी।
वर्तमान की बात करें तो 28 की बात करते हैं, 2047 की 4.3 ट्रिलियन की बात करते हैं लेकिन इन्हें पता ही नहीं है कि इसमें कितने जीरो होते हैं कितने रुपए होते हैं। यह डाटा कहां से लेकर के आ रहे हैं। वर्तमान की बात नहीं करेंगे एक तरफ तो राजस्थान को कर्जे में डुबो दिया है। आज तक ऐतिहासिक कर्ज राजस्थान पर है हर बजट में इतना कर्जा 50 साल में नहीं लिया जितना उन्होंने 2 साल में ले लिया। इन्होंने कहा था कि हम 1000 इलेक्ट्रिक बस खरीदेंगे कितनी बसें खरीदी गई है उसे पर जानकारी देनी चाहिए। जब इन्होंने भरतपुर संभाग में स्पेशल स्पोर्ट्स कंपलेक्स की बात कही थी, मेगा हाईवे पर जीरो एक्सीडेंट की बात कही है। एक बजट में कहा गया की एक्सीडेंट 2047 तक 90 प्रतिशत एक्सीडेंट कम कर देंगे। राजस्थान में जिस प्रकार से एक्सीडेंट हो रहे हैं एक-एक साल एक-एक साथ 15 15 लोगों की डेथ हो रही है कोई सा दिन नहीं जाता जब राजस्थान में एक्सीडेंट की खबर नहीं आती। वह सारी डेथ उसमें ज्यादातर एक्सीडेंट सिस्टम की लापरवाही की वजह से डेथ हो रही हैं। सिस्टम उसे पर ध्यान नहीं दे ब्रेकर की आवश्यकता है, कई खड्डे बने हुए हैं। बजट में कहीं नजर नहीं आता कि भरतपुर वालों का ध्यान रखा गया है। एसओजी ने ओएमआर शीट में जो घोटाला पड़ा है वह लोग आज भी इस सरकार में भी काम कर रहे थे। वह इसमें शामिल इन 2 सालों की जांच क्यों नहीं कर रहे हो,वहमारे भी 5 साल के और आपकी पिछले 5 साल के और 2 साल की भी 12 सालों की जांच सीबीआई से करवा लो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
स्कूलों की बात करें तो 41000 से अधिक स्कूल स्कूल खराब है और बजट में घोषणा ढाई हजार स्कूल की घोषणा को ठीक करने की बात कर रहे हैं, बाकी कहां जाएंगे। ना शिक्षा पर कोई ध्यान देना, चिकित्सा की हालत यह है कि जो हमने चिरंजीवी बीमा योजना शुरू की थी, आज उसे योजना को का भुगतान रोक रोक के लगभग सभी हॉस्पिटल उसे योजना से निकल गए। इन्होंने मनोचिकित्सा की बात की, आत्महत्या बढ़ती जा रही है पहले तो सरकार को अपना मेंटल हेल्थ चेकअप करवाना चाहिए कि सरकार किस स्थिति में है। सरकार के मंत्री हैं उनकी क्या स्थिति है। वह निर्णय की स्थिति नहीं कर रहे हैं। आज इस सरकार के निर्णय की वजह से लोग सुसाइड कर रहे हैं। सरकारी कर्मचारी सुसाइड कर रहे हैं। आम पब्लिक सुसाइड कर रही है। पब्लिक को मेंटल हेल्थ की जरूरत नहीं है। इस सरकार को मेंटल हेल्थ की जरूरत है,ताकि जनता के हित के निर्णय हों सकें। एसआईआर का इतना टाइम बाउंड प्रोग्राम कर दिया कि अलवर में एक टीचर ने सुसाइड कर लिया। जिलों में मिनी सचिवालय बनवाने की पिछली बार भी घोषणा की थी उसके बारे में क्या हुआ।
पिछले बजट में भी घोषणा की थी कितने मिनट सचिवालय बनवा दिए हैं या केवल पब्लिक को गुमला करने काम करते हैं। आज बजट में ऐसा कुछ था ही नहीं। नरेंद्र मोदी के नाम पर नर्सरी लग रहे हैं। पिछले बजट में पिछले साल 19 करोड रुपए अलग पौधे लगा दिए, 10 करोड रुपए पौधे इस बार लगाए हैं। जो पौधे लगाए हैं वह बचे रहें पहले आप उनका वेरिफिकेशन करवाइए। पब्लिक को बताइए की 19 करोड़ पेड़ आपने कहां-कहां लगवाएं ताकि लोगों को बता सके अधिक और लोगों को उनको संभालने की जिम्मेदारी जितने सरकारी पैसे का जितना दुरुपयोग कर रहे हो जितना भ्रष्टाचार के प्लेबाजी चल रही है इतने कहीं नहीं है। हमारे समय में हमने मिनिमम गारंटी एक्ट बनाया था कि लोगों को पेंशन हर साल बढ़ाई जाए उसे पर कोई चर्चा नहीं है।

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