52 करोड़ वर्ष पुरानी समुद्री दुनिया का रहस्य, ममी स्टोन में कैद ट्राइलोबाइट जीवाश्म बना आकर्षण का केंद्र

खजाना महल में प्रदर्शित दुर्लभ जीवाश्म

52 करोड़ वर्ष पुरानी समुद्री दुनिया का रहस्य, ममी स्टोन में कैद ट्राइलोबाइट जीवाश्म बना आकर्षण का केंद्र
पृथ्वी के प्राचीन इतिहास की अनमोल धरोहर माने जाने वाले ट्राइलोबाइट जीवाश्म ने इन दिनों जयपुर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। गुर्जरघाटी स्थित खजाना महल में प्रदर्शित यह दुर्लभ जीवाश्म करीब 52 करोड़ वर्ष पुरानी समुद्री दुनिया की झलक प्रस्तुत करता है।

जयपुर। पृथ्वी के प्राचीन इतिहास की अनमोल धरोहर माने जाने वाले ट्राइलोबाइट जीवाश्म ने इन दिनों जयपुर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। गुर्जरघाटी स्थित खजाना महल में प्रदर्शित यह दुर्लभ जीवाश्म करीब 52 करोड़ वर्ष पुरानी समुद्री दुनिया की झलक प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से गोलाकार आकार में तराशी गई चट्टान पर सुरक्षित यह जीवाश्म संग्रहकर्ताओं के बीच ममी स्टोन के नाम से भी जाना जाता है। मोरक्को से जयपुर तक का सफर खजाना महल के फाउंडर डायरेक्टर अनूप श्रीवास्तव के अनुसार यह जीवाश्म मोरक्को से लाकर यहां प्रदर्शित किया गया है। इसकी अनोखी बनावट और करोड़ों वर्ष पुरानी कहानी पर्यटकों में उत्सुकता पैदा करती है।

दिलचस्प बात यह है कि जहां पर्यटक जयपुर के अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में लगभग 2400 वर्ष पुरानी मिस्र की ममी देखते हैं, वहीं खजाना महल में उन्हें करोड़ों वर्ष पुराने जीवन का साक्ष्य माने जाने वाले इस ममी स्टोन को देखने का अवसर मिलता है। उनके अनुसार यह जीवाश्म ट्राइलोबाइट समूह के फैकोपिडा गण से संबंधित हो सकता है, जिसमें फैकोप्स और जेरास्टोस जैसी प्रजातियां शामिल हैं। ट्राइलोबाइट विलुप्त समुद्री आर्थ्रोपोड थे, जो लगभग 52 करोड़ वर्ष पहले से 25.2 करोड़ वर्ष पहले तक पृथ्वी के महासागरों में विचरण करते थे।

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