सरिस्का बाघ अभयारण्य की नई सीमा तय करने की प्रक्रिया शुरु : प्रशासन ने मांगी आपत्तियां, अधिसचूना की जारी

सरकार ने अधिसूचना का मसौदा जारी किया था

सरिस्का बाघ अभयारण्य की नई सीमा तय करने की प्रक्रिया शुरु : प्रशासन ने मांगी आपत्तियां, अधिसचूना की जारी

संबंध में अलवर जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने अधिसूचना जारी कर के प्रभावित ग्रामीणों और आमजन से दावे और आपत्तियां मांगी हैं। 

अलवर। जिला प्रशासन ने सरिस्का बाघ अभयारण्य की नई सीमा तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके लिए दावे और आपत्तियां मांगी गई हैं। आधिकारिक सू्त्रों ने बताया कि संकटग्रस्त बाघ आवास (सीटीएच) में बदलाव को लेकर ग्रामसभाओं के माध्यम से सुझाव, परामर्श और आपत्तियां मांगी गई हैं। इस संबंध में अलवर जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने अधिसूचना जारी कर के प्रभावित ग्रामीणों और आमजन से दावे और आपत्तियां मांगी हैं। 

सूत्रों ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश और विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बाद सरिस्का के सीटीएच का दायरा बढ़ाकर 92 हजार 448 हेक्टर किया गया है। सरिस्का बाघ अभयारण्य में सीटीएच पहले 881.11 वर्ग किलोमीटर था, जिसे बढ़ाकर 924.48 वर्ग किलोमीटर किया गया है। इसे लेकर 10 नवम्बर को राज्य सरकार ने अधिसूचना का मसौदा जारी किया था। सूत्रों ने बताया कि प्रशासन ने दावे, सुझावों के लिए एक महीने का समय दिया है। दो अलग-अलग समय सीमाएं तय करके कहा है कि एक महीने अर्थात 30 दिन के बाद प्राप्त आवेदन दावों, सुझाव और आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रशासन द्वारा जारी सूचना में सरिस्का अभयारण्य में शामिल की जा रही 36 हजार 666 हेक्टेयर नई भूमि में किसी का कानूनी अधिकार या भूमि है, तो दो महीने के भीतर लिखित दावा पेश करना होगा । यह दावा अतिरिक्त जिला कलेक्टर द्वितीय कार्यालय में या अलवर जिला कलेक्टर की सरकारी मेल पर भेज सकते हैं। 

इसी तरह सरिस्का के मध्यवर्ती और आंतरिक क्षेत्र पर बदलाव के लिए सुझाव और आपत्तियां के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। इसके लिए उप वन संरक्षक (डीसीएफ) सरिस्का और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आगामी ग्रामसभा में प्रस्ताव रखेंगे और ग्राम को ग्रामीणों के सुझाव एकत्रित करके प्रशासन को सौंपा जाएगा। सूत्रों ने बताया कि सरिस्का के सीटीएच बदलाव को लेकर तैयार किए गए प्रस्ताव को लेकर गत वन्यजीव प्रेमियों ने आपत्ति की थी। इस पर यह मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा। उच्चतम न्यायालय ने आपत्ति मांगने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए थे क्योंकि यह मामला सीधे खनन कार्य से जुड़ा था। वन्यजीव प्रेमियों का आरोप था कि सीटीएच से कुछ हिस्सों को हटाकर मध्यवर्ती क्षेत्र बनाया जा रहा है, जिससे वहां खनन का कार्य शुरु कराया जा सके। 

 

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