राजस्थान सरकार ने जारी की एमनेस्टी स्कीम-2026, बकाया कर व विवादित मांगों के निपटान का मिलेगा मौका
योजना में विभिन्न पुराने कर कानूनों को शामिल
वित्त विभाग ने राजस्थान वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 174 की उपधारा के तहत अधिकारों का उपयोग करते हुए “एमनेस्टी स्कीम-2026” लागू करने की अधिसूचना जारी की है। यह योजना जनहित में बकाया कर और विवादित मांगों के निपटान तथा कर में रियायत प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई।
जयपुर। वित्त विभाग (कर प्रभाग) ने राजस्थान वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 174 की उपधारा (2A) के तहत अधिकारों का उपयोग करते हुए “एमनेस्टी स्कीम-2026” लागू करने की अधिसूचना जारी की है। यह योजना जनहित में बकाया कर और विवादित मांगों के निपटान तथा कर में रियायत प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई है। जारी अधिसूचना के अनुसार यह योजना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और 30 सितम्बर 2026 तक प्रभावी रहेगी। योजना के तहत 30 जून 2017 तक की अवधि से संबंधित बकाया मांग या विवादित राशि वाले डीलरों और व्यक्तियों को राहत का अवसर दिया जाएगा। हालांकि योजना में स्पष्ट किया गया है कि राजस्थान वैट अधिनियम, 2003 और केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 के अंतर्गत आने वाले उन मामलों पर यह योजना लागू नहीं होगी, जो संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 54 में शामिल वस्तुओं से संबंधित हैं।
योजना में विभिन्न पुराने कर कानूनों को शामिल किया गया है, जिनमें राजस्थान सेल्स टैक्स अधिनियम 1954, 1994, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम 1956, एंट्री टैक्स, मोटर व्हीकल एंट्री टैक्स, मनोरंजन एवं विज्ञापन कर, लक्ज़री टैक्स और तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले कर से जुड़े अधिनियम शामिल हैं। स्कीम के तहत आवेदन करने वाले व्यक्ति या डीलर को “आवेदक” माना जाएगा, जबकि संबंधित मामलों के निपटान की प्रक्रिया निर्धारित आकलन प्राधिकारी के माध्यम से पूरी की जाएगी। विभागीय डिमांड एंड कलेक्शन रजिस्टर (DCR) में दर्ज बकाया मांगों के आधार पर मामलों का निपटारा किया जाएगा।

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