जयपुर की राखियों का देशभर में जलवा : गोविंद देव जी और लड्डू गोपाल की राखियों की भारी मांग, डिजिटल बाजार में भी धूम
15 करोड़ के पार पहुंचा कारोबार
जयपुर। भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही गुलाबी नगरी जयपुर का राखी बाजार पूरी तरह से सज चुका है। इस बार बाजार में एक अनोखा और बेहद खूबसूरत ट्रेंड देखने को मिल रहा है। बहनें अपने भाई के लिए राखी खरीदने से पहले घर के आराध्य 'लड्डू गोपाल' और जयपुर के 'गोविंद देव जी व गोपीनाथ जी' के लिए राखी की मांग कर रही हैं। ग्राहक दुकानों पर पहुंचकर सबसे पहले ठाकुर जी की राखी की फरमाइश करते हैं।
देशभर में जयपुर की राखियों का दबदबा, 15 करोड़ के पार पहुंचा कारोबार :
एस.के. राखी के प्रोपराइटर सतीश अग्रवाल ने बताया कि जयपुर में तैयार होने वाली राखियों की मांग सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने में है। इस साल जयपुर के राखी कारोबार में 15 से 20 प्रतिशत का बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। अनुमान के मुताबिक, जयपुर का कुल राखी व्यापार इस बार 15 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। थोक बाजारों में स्थिति यह है कि त्योहार से पहले ही लगभग पूरा स्टॉक क्लियर हो चुका है।इन वैरायटीज की है सबसे ज्यादा मांगजयपुर की पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक डिजाइनों का मिश्रण इस बार ग्राहकों को खूब लुभा रहा है।
बाजार में मुख्य रूप से निम्नलिखित राखियां चलन में हैं पारंपरिक राखियां : कुंदन-मीना, मोली, चंदन और जरदोजी की राखियां।ठाकुर जी की राखियां: लड्डू गोपाल, गोविंददेवजी और गोपीनाथ जी की विशेष राखियां।ट्रेंडी और फैंसी वैरायटी: ब्रेसलेट राखी, म्यूजिकल राखी, कश्मीरी वर्क और वॉच राखी।महिलाओं और बच्चों के लिए: चूड़ा लूम्बा, फैंसी मैसी राखी और बच्चों के पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर।पूजा किट व गिफ्ट्स: गिफ्ट कॉम्बो, रोली-चावल, नारियल और डेकोरेटिव शगुन पैकेट्स।थोक बाजार में ₹1 से ₹500 तक के दाम, रिटेल में ऑनलाइन की धूमजयपुर का नाहरगढ़ रोड और पुरोहित जी का कटला इस समय थोक व्यापार के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। थोक बाजार में राखियों की कीमतें ₹1 से लेकर ₹500 प्रति नग तक उपलब्ध हैं, जिससे हर वर्ग के व्यापारियों को बेहतरीन वैरायटी मिल रही है। वहीं दूसरी ओर, जयपुर का रिटेल (खुदरा) मार्केट भी पूरी तरह सज चुका है। इस बार रिटेल बाजार में ऑफलाइन के मुकाबले ऑनलाइन बिक्री का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, क्योंकि लोग घर बैठे जयपुर की खूबसूरत राखियां मंगवाना पसंद कर रहे हैं।
जयपुर की राखियों की खासियत और इतिहासजयपुर की राखियों की मांग देशभर में होने के पीछे यहां की सदियों पुरानी हस्तशिल्प कला (Handicraft) है। जानिए क्यों खास हैं जयपुर की राखियां:कुंदन-मीनाकारी का बेजोड़ हुनर: जयपुर को रत्नों और मीनाकारी का गढ़ माना जाता है। राखियों में असली कुंदन और बारीक मीनाकारी का जो काम जयपुर के कारीगर करते हैं, वह देश में कहीं और देखने को नहीं मिलता।धार्मिक आस्था से जुड़ाव: जयपुर के लोगों के जीवन में राधा-गोविंददेवजी रचे-बसे हैं। यही कारण है कि ठाकुर जी के स्वरूप वाली राखियों में जो पवित्रता और बारीक कारीगरी यहां मिलती है, उसकी मांग देश-विदेश में रहने वाले प्रवासी भारतीयों में भी बहुत अधिक है।रोजगार का बड़ा साधन: राखी का यह करोड़ों का कारोबार जयपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों की हजारों महिला कारीगरों और स्थानीय बुनकरों को प्रत्यक्ष रोजगार देता है। जरदोजी और मोली की राखियां पूरी तरह हैंडमेड (हस्तनिर्मित) होती हैं, जो 'वोकल फॉर लोकल' का बेहतरीन उदाहरण हैं।

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