तीन दिन के नवजात के दिल में लगाया स्टेंट, महात्मा गांधी अस्पताल के विशेषज्ञों ने दिया नवजात को नया जीवन

एक जटिल जन्मजात हृदय रोग पल्मोनरी एट्रिजिया का लक्षण था

तीन दिन के नवजात के दिल में लगाया स्टेंट, महात्मा गांधी अस्पताल के विशेषज्ञों ने दिया नवजात को नया जीवन
राजधानी में अब नवजात बच्चों के हार्ट की जटिल बीमारियों का बिना ऑपरेशन बैलूनिंग तथा स्टेटिंग से उपचार किया जा रहा हैं

जयपुर। राजधानी में अब नवजात बच्चों के हार्ट की जटिल बीमारियों का बिना ऑपरेशन बैलूनिंग तथा स्टेटिंग से उपचार किया जा रहा हैं।  ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल जयपुर में सामने आया।   तीन दिन पहले जन्मे एक बच्चे को  ऑक्सीजन की

गंभीर कमी तथा शरीर के  नीले पड़ने की शिकायत के साथ अजमेर से रेफर किया गया था। जांच किए जाने पर ज्ञात हुआ की बच्चे के फेफड़ों में रक्त प्रवाह बहुत ही कम हो रहा था। यह एक जटिल जन्मजात हृदय रोग पल्मोनरी एट्रिजिया का लक्षण था। बच्चे की कमजोर स्थिति को देखते हुए ओपन हार्ट सर्जरी की बजाय नॉन इंटरवेंशनल पीडीए स्टेटिंग तकनीक द्वारा एक तार के जरिए हृदय की पीडीए वाहिनी में स्टेंट लगाया गया। यह प्रयास सफल रहा और बच्चे के फेफड़ों में रक्त संचार सामान्य हो गया। तीन दिन के नवजात में इस तरह की पीडीए स्टेटिंग का संभवतः यह प्रदेश में पहला मामला है।

इस प्रक्रिया में शिशु हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ  संजय खत्री, डॉ कनुप्रिया चतुर्वेदी तथा डॉ प्रेरणा भट्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रही। चिकित्सकों ने बताया कि ऐसे मामलों में सर्जरी के अलावा पीडीए स्टेंटिंग का विकल्प भी होता है जिसमें जांघ के रास्ते कैथेटर को हृदय तक पहुंचाकर पीडीए नली को खुला रखा जा सकता है। प्रक्रिया के बाद बच्चे के फेफड़ों में रक्त संचार सामान्य हो गया है।

उन्होंने बताया कि बच्चे के पल्मोनरी वाल्व बना ही नहीं था। पीडीए के रास्ते ही खान का संचार हो रहा था। सामान्यतः पीडीए नली जन्म के 2 या तीन दिन में स्वतः ही बंद हो जाती है। इस प्रक्रिया में बिना ऑपरेशन द्वारा किया गया जिससे नौनिहाल को जटिलताओं से बचाया जा सका।  गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशु पर अपना पहला पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसिस (पीडीए) स्टेंटिंग सफलतापूर्वक किया, जो राजस्थान के लिए बच्चों में दिल की बीमारियोंके उपचार में महत्वपूर सफलता माना जा रहा है।

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पीडियाट्रिक कार्डियक साइंसेज के निदेशक डॉ सुनील कुमार कौशल ने बताया कि पीडीए स्टेंटिंग जैसी नॉन इनवेसिव उपचार के लिए  महात्मा गाँधी अस्पताल राज्य का एकमात्र समर्पित उपचार केंद्र है जहां जटिल से जटिल शिशु ह्रदय रोगों का उपचार प्रभावी ढंग से सफलतापूर्वक किया जा रहा है।  डॉ  कौशल ने बताया कि पीडीए स्टेंटिंग उन नाजुक नवजात शिशुओं के लिए एक गेम चेंजर है जिनकी तत्काल सर्जरी नहीं  की जा सकती है।

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