एसएमएस में HLA-मिसमैच और ABO-मिसमैच के साथ बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफल, बीमारी बढ़ने के बाद लिम्फॉइड ब्लास्ट फेज में पहुंच गया था मरीज
ट्रांसप्लांट से पहले दी गहन कीमोथेरेपी
जयपुर। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के क्लिनिकल हेमेटोलॉजी विभाग ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग में पहली बार HLA-मिसमैच्ड डोनर और मेजर ABO ब्लड ग्रुप मिसमैच के साथ एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की स्थिति में संतोषजनक सुधार होने पर उसे मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 49 वर्षीय पुरुष मरीज क्रॉनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया (CML) से पीड़ित था और बीमारी बढ़ने के बाद लिम्फॉइड ब्लास्ट फेज में पहुंच गया था। ट्रांसप्लांट से पहले उसे गहन कीमोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी दी गई।
उपचार के बाद मरीज MRD निगेटिव स्थिति में पहुंचा, जिसके बाद ट्रांसप्लांट की तैयारी की गई। मरीज का HLA-मिसमैच्ड पारिवारिक डोनर से ट्रांसप्लांट किया गया। मरीज और डोनर के बीच मेजर ABO मिसमैच होने के कारण प्रक्रिया और अधिक चुनौतीपूर्ण थी। उपचार के दौरान मरीज की सघन निगरानी, ट्रांसफ्यूजन, लैब जांच और आवश्यक सपोर्टिव सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस पूरी अत्याधुनिक और महंगी चिकित्सा प्रक्रिया को राज्य सरकार की MAA योजना के तहत पूरी तरह निशुल्क किया गया। सफलता में विभागाध्यक्ष डॉ. विष्णु शर्मा, डॉ. देवेश पाराशर सहित बोन मैरो ट्रांसप्लांट, नर्सिंग, लैबोरेटरी और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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