जीमने नहीं बुलाया तो चुनाव हरा दिया!’ हार के बाद भाजपा प्रत्याशी का पोस्ट से सियासी वार
अलवर में चुनावी हार के बाद भाजपा की अंदरूनी कलह उजागर
अलवर। नगर निगम चुनाव के नतीजे सामने आने के साथ ही भाजपा के भीतर की सियासी खींचतान भी खुलकर सामने आ गई है। वार्ड 23 से भाजपा प्रत्याशी रहीं सुमन चौधरी की सोशल मीडिया पोस्ट ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी। चुनाव हारने के बाद उन्होंने पार्टी के ही तीन नेताओं पर उन्हें और उनके पति को हराने के लिए पूरी ताकत लगाने का आरोप लगाया। सुमन चौधरी के पति सीताराम चौधरी भी वार्ड 28 से भाजपा प्रत्याशी थे, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। एक ही परिवार के दोनों प्रत्याशियों की हार के बाद सुमन की पोस्ट ने पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को सार्वजनिक कर दिया।
‘जीमने नहीं बुलाया तो हराने में लगा दी ताकत’
सुमन चौधरी ने अपनी पोस्ट में भाजपा के दो पूर्व जिलाध्यक्ष पं. धर्मवीर शर्मा और संजय नरूका तथा जिला प्रवक्ता दीपक पंडित के नाम लेते हुए आरोप लगाया कि इन नेताओं ने उन्हें और उनके पति को चुनाव हराने के लिए जी-तोड़ मेहनत की। पोस्ट में उन्होंने यह भी लिखा कि उन्होंने इन नेताओं को अपने घर के जीमने के कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया था, जिसके बाद उनकी नाराजगी चुनाव में दिखाई दी। इस टिप्पणी के सामने आते ही भाजपा की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
दोनों वार्डों में कांग्रेस ने मारी बाजी
नगर निगम चुनाव में वार्ड 23 से कांग्रेस प्रत्याशी रवि ने जीत दर्ज की, जबकि वार्ड 28 में कांग्रेस के रितेश विजयी रहे। भाजपा प्रत्याशियों की हार के बाद अब पार्टी के भीतर हार के कारणों को लेकर मंथन के साथ-साथ आरोप-प्रत्यारोप भी तेज होते नजर आ रहे हैं।
बढ़ते विवाद के बीच दूसरी पोस्ट से दी सफाई
पहली पोस्ट के बाद सुमन चौधरी ने एक और सोशल मीडिया पोस्ट कर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी पोस्ट किसी व्यक्ति का अपमान करने के उद्देश्य से नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा के सभी वरिष्ठ और कनिष्ठ कार्यकर्ता इन दोनों वार्डों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनका सहयोग करेंगे। उनका कहना था कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं का अपेक्षित सहयोग मिलता तो शायद चुनाव परिणाम कुछ और होते। हालांकि, सुमन चौधरी द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना यह है कि चुनावी हार के बाद शुरू हुई यह सोशल मीडिया की सियासी तकरार पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर कितना असर डालती है।

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