श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 26 सितम्बर से, 16 दिन नहीं होंगे मांगलिक कार्य
समापन 11 अक्टूबर को होगा
जयपुर। श्राद्ध (पितृ पक्ष) 26 सितम्बर से शुरू होंगे और उनका समापन 11 अक्टूबर को होगा। मान्यता है कि पूर्वज पितृ लोक में वास करते हैं और श्राद्ध पक्ष के 16 दिनों के लिए वे धरती पर आते हैं। उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, अर्पण और दान देने की परंपरा है। ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती हैं और उन्हें मोक्ष मिलता है। पंचांग के अनुसार पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से होगी और आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर इसका समापन होता है। कहा जाता है कि पितृपक्ष में पूर्वजों को जल देने का विधान है। पितरों की कृपा नहीं हो, तो जातक की कुंडली में पितृ दोष लगता है।
श्रद्धापूर्वक अपने पितरों को प्रसन्न करना:सनातन मान्यता के अनुसार जो परिजन अपना देह त्यागकर चले गए हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धा के साथ जो तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है। मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में जीव को मुक्त कर देते हैं ताकि वे स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें।
शुभ कार्य नहीं होते हैं :
गृह प्रवेश, कानछेदन, मुंडन, शादी, विवाह नहीं कराए जाते। इसके साथ ही इन दिनों में न कोई नया कपड़ा खरीदा जाता और न ही पहना जाता है। पितृ पक्ष में लोग अपने पितरों के तर्पण के लिए पिंडदान, हवन भी कराते हैं।
इनका कहना है-
‘पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से होगी और आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर इसका समापन होता है। कहा जाता है कि पितृपक्ष में पूर्वजों को जल देने का विधान है। पितरों की कृपा नहीं हो, तो जातक की कुंडली में पितृ दोष लगता है। श्राद्ध की समायावधि में मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। -अनीष व्यास, ज्योतिषाचार्य,जयपुर
श्राद्ध की तिथियां :
26 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर- प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर- द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर- तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर चतुर्थी श्राद्ध और पंचमी श्राद्ध
1 अक्तूबर- षष्ठी श्राद्ध
2 अक्तूबर- सप्तमी श्राद्ध
3 अक्तूबर- अष्टमी श्राद्ध
4 अक्तूबर- नवमी श्राद्ध
5 अक्तूबर- दशमी श्राद्ध
6 अक्तूबर- एकादशी श्राद्ध
7 अक्तूबर- द्वादशी श्राद्ध
8 अक्तूबर- त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्तूबर- चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्तूबर- सर्व पितृ अमावस्या
11 अक्तूबर - मातामह नान श्राद्ध

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