निलंबित व्याख्याता आत्महत्या का मामला : एसओजी अधिकारियों पर प्रताड़ना के आरोप, सुसाइड नोट में खुद को बताया निर्दोष

परिजनों का शव लेने से इनकार, अस्पताल के बाहर धरना

निलंबित व्याख्याता आत्महत्या का मामला : एसओजी अधिकारियों पर प्रताड़ना के आरोप, सुसाइड नोट में खुद को बताया निर्दोष

निलंबित व्याख्याता मनोहर लाल भादू की मौत के बाद मामला लगातार विवाद जैसी स्थिति उत्पन्न कर रहा। मृतक मनोहर के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया।  मुआवजे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एसएमएस अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

जयपुर। महेश नगर थाना इलाके में ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या करने वाले निलंबित व्याख्याता मनोहर लाल भादू की मौत के बाद मामला लगातार विवाद जैसी स्थिति उत्पन्न कर रहा है। मृतक मनोहर के परिजनों ने गुरुवार को शव लेने से इनकार कर दिया।  मुआवजे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एसएमएस अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगें पूरी नहीं करती, तब तक न तो शव उठाया जाएगा और न ही धरना समाप्त किया जाएगा। परिजनों का आरोप है कि मनोहर लाल भादू की मौत के लिए एसओजी के दो अधिकारी श्यामसुंदर और मुकेश सोनी जिम्मेदार हैं। 

सुसाइड नोट में लगाए प्रताड़ना के आरोप
परिजनों के अनुसार मनोहर लाल भादू ने आत्महत्या से पहले अपने दोस्तों को सुसाइड नोट भेजा था, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताया है। सुसाइड नोट में लिखा गया है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा था और हर बार किसी भी प्रकरण में किसी की गिरफ्तारी होने पर जबरन उनका नाम जोड़ दिया जाता था। बार-बार की पूछताछ, दबाव और मानसिक उत्पीड़न से वह पूरी तरह टूट चुके थे।

यह हैं परिजनों की प्रमुख मांगें
सुसाइड नोट में नामजद एसओजी के दोनों अधिकारियों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया जाए। निलंबन अवधि का पूरा वेतन और एरियर तत्काल दिया जाए। पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा और 30 दिन के भीतर अनुकंपा नियुक्तिप्रदान की जाए। 

परिवार की स्थिति
35 वर्षीय मनोहर लाल भादू मूल रूप से जालोर जिले के सांचौर कस्बे के रहने वाले थे। उनकी पत्नी और तीन छोटे बच्चे गांव में रहते हैं। निलंबन के बाद वह जयपुर के महेश नगर इलाके में किराए के मकान में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। बुधवार शाम अर्जुन नगर रेलवे फाटक के पास उन्होंने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। शव एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। धरना स्थल पर राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी भी पहुंचे और पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर समर्थन दिया।  

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