दुधारू गाय को खुला छोड़ना पड़ रहा भारी, एक बार में 56 सौ रुपए लग रहा जुमार्ना
निगम ने फरवरी में पकड़ी 300 गाय
निगम की ओर से अभियान चलाकर पकड़ना शुरू किया तो पशु पालक ही विरोध कर रहे है।
कोटा। शहर में एक तरफ सड़कों पर निराश्रित हालत में घूम रहे मवेशी आमजन के लिए खतरा व हादसों का कारण बन रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पशु पालक पालतू पशुओं को भी सड़कों पर खुला छोड़ रहे हैं। जबकि अब निगम की ओर से उन्हें पकड़ने का अभियान चलाया हुआ है। जिससे अब दुधारू गाय को खुला छोड़ना पशु पालकों के लिए भारी पड़ रहा है। शहर में मवेशियों के कारण हो रहे हादसों को देखते हुए नगर निगम की ओर से उन्हें अभियान चलाकर पकड़ा जा रहा है। नगर निगम के गौशाला अनुभाग व अतिक्रमण निरोधक दस्ते की टीम द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लगातार पशुओं को पकड़ा जा रहा है। जिससे पशु पालकों में हडकम्प मचा हुआ है।
गत माह पकड़े 300 मवेशी
नगर निगम के गौशाला अनुभाग की ओर से लगातार मवेशियों को पकड़ा जा रहा है। वहीं फरवरी में अभियान चलाकर शहर के सभी क्षेत्रों से मवेशी पकड़े गए। निगम की गौशाला से प्राप्त जानकारी के अनुसार फरवरी में करीब 300 मवेयिशों को पकड़ा गया है। उनमें से करीब 90 फीसदी पालतू और उनमें भी अधिकतर दुधारू गाय हैं।
निगम टीम को करना पड़ रहा विरोध का सामना
नगर निगम की ओर से एक तरफ तो आमजन को राहत देने के लिए सड़कों से निराश्रित पशुओं को पकड़ा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ मवेशियों को पकड़ने के दौरान निगम टीम को लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। गत दिनों सकतपुरा में गायों को पकड़ने के दौरान कुछ लोगों ने उन्हें सरकारी स्कूल में घुसा दिया था। जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया। वहीं एक जगह पर पशु पालकों ने निगम के वाहन से ही पशुओं को छुड़ा लिया था।
विरोध का कारण अधिक जुमार्ना
नगर निगम सूत्रों के अनुसार शहर में सड़कों पर सांड को छोड़कर अधिकतर पालतू पशु हैं। जिन्हें पशु पालक दूध निकालने के बाद चरने के लिए खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में एक बार पकड़े जाने के बाद उन पशुओं को छोड़ने पर 56 सौ रुपए जुमार्ना लगता है। साथ ही सौ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से चारे-पानी का भी लगता है। एक बार में यदि किसी पशु पालक के दो-तीन पशु भी पकड़े गए तो उन्हें छुडवाना भारी पड़ता है। इस कारण से लोग उन्हें पकड़ने ही नहीं देते हैं।
निगम गौशाला में क्षमता से अधिक मवेशी
नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 2 हजार से अधिक मवेशी हैं। जबकि इसकी क्षमता ही करीब 15 सौ की है। हालांकि यहां मवेशियों को रखने के लिए अलग-अलग बाड़े बनाए हुए हैं। लेकिन उनमें से कई तो बीमार, लावारिस व पॉलिथीन खाई हुई है। करीब 25 फीसदी सांड हैं। दुधारू गाय भी हैं।हालांकि केडीए की ओर से निगम की गौशाला विस्तार के लिए जमीन आवंटित कर दी है। उस पर चार दीवारी निर्माण का काम किया जा हरा है।
इनका कहना है
शहर में सड़कों पर अधिकतर पालतू पशु हैं। पशु पालक जानबूझकर उन्हें छोड़ रहे हैं। अब निगम की ओर से अभियान चलाकर उन्हें पकड़ना शुरू किया तो पशु पालक ही विरोध करने आते हैं। इसका कारण एक तो गाय का दुधारू व महंगा होना है। साथ ही पकड़े जाने पर उसे छुड़वाना अधिक महगा पड़ रहा है। गाय के 56 सौ व बछड़े के 4 हजार रुपए लगते हैं। फरवरी में 300 पशु पकड़े जिनमें से करीब 90 फीसदी गाय हैं। हालांकि उनमें से 25 से 30 गायों को पशु पालकों ने छुडंवाया है। जिनसे निगम को करीब डेढ़ लाख रुपए से अधिक जुमार्ने के रूप में राजस्व प्राप्त हुआ है।
- महावीर सिंह सिसोदिया, प्रभारी गौशाला, नगर निगम कोटा

Comment List