गिरफ्तारी के आधार नहीं बताने के आधार पर जासूस को जमानत, हर माह संबंधित थाने में हाजिरी देगा आरोपी
आदेश की कॉपी को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजी
हाईकोर्ट ने जासूसी मामले के आरोपी झबराराम को जमानत देते हुए बड़ा संदेश दिया—*“गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य है”*। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के समय वजह न बताना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। डीजीपी व अभियोजन निदेशक को जांच अधिकारी और लोक अभियोजक पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जासूसी से जुड़े मामले में आरोपी को इस आधार पर जमानत का लाभ दिया है कि उसे गिरफ्तार करते समय विधिवत रूप से इसका कारण नहीं बताया गया था। इसके साथ ही अदालत ने आदेश की कॉपी डीजीपी और अभियोजन निदेशक को भेजते हुए कहा है कि मामले के जांच अधिकारी और लोक अभियोजक के खिलाफ कार्रवाई करें। अदालत ने मामले में एसीजेएम क्रम-5, जयपुर प्रथम की ओर से की गई कार्रवाई को लेकर आदेश की कॉपी को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजी है। जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने यह आदेश झबराराम को सशर्त जमानत देते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक हर माह की 25 तारीख को संबंधित थाने में हाजिरी देगा। स्पेशल पुलिस स्टेशन उसी दिन इसकी रिपोर्ट संबंधित अदालत में पेश करेगा। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार प्रस्तुत करना जांच एजेंसी और रिमांड देने वाली अदालतों के लिए अनिवार्य है। वहीं रिमांड आवेदन पर विचार करते समय मजिस्ट्रेट को विशेष रूप से सुनिश्चित करना होगा कि क्या गिरफ्तारी के आधार विधिवत रूप से अभियुक्त को बताए गए हैं।
जमानत याचिका में अधिवक्ता आरबी शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता को देश की सामरिक महत्व की सूचना विदेशी एजेंट को भेजने के आरोप में गत जनवरी माह में गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए। जिससे उसका संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त संवैधानिक अधिकार की अवहेलना हुई है। किसी आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार केवल औपचारिकता मात्र नहीं है और ऐसी सूचना नहीं देने पर गिरफ्तारी कानूनी रूप से अमान्य हो जाती है। इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाए।

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