हाईवे-एक्सप्रेस-वे से आवारा पशु हटाने के लिए NHAI करे कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश
राष्ट्रीय राजमार्ग कोई डामर की परत नहीं, सार्वजनिक सुरक्षा के गलियारे
सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएआई को नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे से आवारा पशुओं को हटाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर व्यापक और समयबद्ध व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। NHAI अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता; सड़क सुरक्षा उसकी वैधानिक जिम्मेदारी है। हाईवे पर 24x7 गश्त, हेल्पलाइन, विशेष वाहन, आश्रय स्थल और पशु-चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित होगी। अधिकारियों पर जवाबदेही तय होगी।
जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस -वे से आवारा पशुओं और अन्य जानवरों को हटाने के लिए एनएचएआई को निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि केन्द्र और राज्य सरकार के समन्वय में इस समस्यों से निपटने के लिए व्यापक और समयबद्ध तंत्र विकसित कर उसे लागू किया जाए। अदालत ने माना कि एनएचएआई यह कहकर नहीं बच सकता कि आवारा मवेशियों या अन्य पशुओं को हटाना केवल राज्य सरकार, नगर निकाय या स्थानीय प्रशासन का काम है। अदालत ने अपने आदेश को दोहराते हुए कहा कि नगर निकायों, सड़क एवं परिवहन विभागों, लोक निर्माण विभागों और एनएचएआई को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले स्टेट हाईवे, नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस वे से सभी आवारा मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीीय राजमार्ग कोई डामर की परत नहीं, सार्वजनिक सुरक्षा के गलियारे हैं।
एनएचएआई जिम्मेदारी नहीं टाल सकता
एनएचएआई ने पूर्व में शपथ पत्र पेश कर कहा था कि पशुओं को हटाने के मामले में वह मुख्य रूप से राज्यों और स्थानीय निकायों पर निर्भर है और उसकी भूमिका केवल समन्वय या सुविधा देने तक सीमित है। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं करते हुए कहा कि ने कहा कि एनएचएआई नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस वे के विकास, रखरखाव और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार वैधानिक संस्था है। इसलिए सड़क-सुरक्षा की उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
संयुक्त अभियान चलाना होगा
कोर्ट ने निर्देश दिया कि एनएचएआई और राज्य सरकारें मिलकर ऐसे हाईवे और एक्सप्रेसवे के हिस्सों की पहचान करें, जहां बार-बार आवारा पशु दिखते हैं। इसके बाद इन पशुओं को हटाकर आश्रय-स्थल, गौशाला, कैटल पाउंड या अन्य उपयुक्त स्थानों पर रखा जाए। वहां भोजन, पानी और पशु-चिकित्सा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
24 घंटे गश्त और हेल्पलाइन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजमार्गों पर समर्पित गश्ती दल या मौजूदा सड़क-सुरक्षा इकाइयां लगाई जाएं। ये दल चौबीसों घंटे निगरानी करेंगे और पशुओं के कारण यातायात बाधित होने या दुर्घटना का खतरा दिखने पर तत्काल कार्रवाई करेंगे। सभी हाईवे पर तय दूरी में हेल्पलाइन नंबर भी लगाए जाएंगे। ये नंबर स्थानीय पुलिस, एनएचएआई और जिला प्रशासन के नियंत्रण कक्षों से जुड़े होंगे।
विशेष वाहन, आश्रय और निगरानी
अदालत ने एनएचएआई को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर व्यापक और समयबद्ध तंत्र बनाने को कहा गया है। इसमें पशुओं को सुरक्षित ढंग से पकड़ने और हटाने के लिए विशेष परिवहन वाहन, रोक-स्थल और आश्रय-स्थल, पशु-कल्याण संगठनों व गौशालाओं से समझौते और सतत निगरानी ढांचा शामिल होगा।
जवाबदेही और अनुपालन रिपोर्ट
कोर्ट ने मुख्य सचिव और एनएचएआई अध्यक्ष को निर्देशों के पालन के लिए जवाबदेह बनाया है। यदि बार-बार आवारा पशु राजमार्गों पर दिखते हैं या हादसे होते हैं तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय हो सकती है। इसके साथ ही अदालत ने आगामी 7 अगस्त तक राज्य सरकार और एनएचएआई सहित अन्य को हाईकोर्ट में शपथ पत्र पेश कर इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है।

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