छोटी मछलियां पकड़ रहे, मगरमच्छों पर नहीं हो रही कार्रवाई
चाइनीज मांझा राह चलते लोगों व पक्षियों के लिए घातक
चाइनीज मांझा बेचने वाले दुकानदारों पर कर रहे कार्रवाई, सप्लायर पकड़ से दूर।
कोटा। मकर संक्रांति का पर्व नजदीक आने के साथ ही शहर में पतंग और मांझे की दुकानें अधिक सजने लगी है। साथ ही शहर में पतंगे भी अधिक उड़ती दिख रही है। ऐसे में पतंगों में उपयोग किया जा रहा चायनीज मांझे के खिलाफ प्रशासन द्वारा छोटे दुकानदारों पर तो कार्रवाई की जा रही है जबकि इसे सप्लाई करने वाले बड़े मगरमच्छ पुलिस व प्रशासन की गिरफ्त से दूर हैं।पतंगों में पहले जहां सादा धागे सद्दे का उपयोग किया जाता था। उसकी जगह पर पतंग काटने के लिए अब अधिकतर मांझे का उपयोग होने लगा है। मांझा भी चायनीज जो काफी घातक है। यह मांझा पतंग उड़ाने वालों के हाथ व अंगुलियों के लिए तो नुकसान दायक है ही। साथ ही पतंग कटने पर उसमें उपयोग हुआ मांझा राह चलते लोगों की गर्दन, आंख व पैर में कट के निशान तक लगा रहा है। वहीं बिजली के तार में उलझने पर करंट फेलने तक का खतरा बना हुआ है। साथ ही पक्षियों के पंख कटने व उनके मरने तक की घटनाएं हो रही है।
निगम की गठित की टीमें, कार्रवाई जारी
बाजार में पतंगों की दुकानों पर चायनीज मांझे की बिक्री पर रोक के लिए नगर निगम की ओर से फायर व अतिक्रमण की टीम गठित की गई है। सीएफओ राकेश व्यास के नेतृत्व में टीम द्वारा लगातार दुकानों पर कार्रवाई भी की जा रही है।
शहर के घंटाघर से लेकर मकबरा तक और तलवंडी से केशवपुरा तक तो कार्रवाई की । साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में कैथून तक पतंगों की दुकानों पर कार्रवाई कर बड़ी संख्या में चायनीज मांझा जब्त भी किया गया। लेकिन हालत यह है कि दुकानों से दो से चार या आठ से दस रोल ही जब्त हो रहे हैं। जबकि दुकानों पर चायनीज मांझा सप्लाई करने वालगे बड़े दुकानदार या सप्लायरों पर अभी तक न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई की ओर न ही नगर निगम की टीम ने।जिससे चोरी छिपे ही सही दुकानों पर यह हर बार सप्लाई हो रहा है। जहां से लोगों तक भी पहुंच रहा है।
पतंगों की दुकानों पर नहीं अन्य जगह से बिक रहा
नगर निगम व पुलिस प्रशासन द्वारा चायनीज मांझे के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के चलते अधिकतर पतंग वाले दुकानदार अपनी दुकानों से मांझा नहीं बेच रहे हैं। जबकि वे गोदाम या किराने व मैस समेत अन्य जगह से यह मांझा बेच रहे हैं। निगम की फायर टीम द्वारा कार्रवाई में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं।
मकर संक्रांति के दिन अधिक घटनाएं
शहर में वैसे तो पिछले काफी समय से पतंग उड़ाने के दौरान चायनीज मांझे से लोगों की गर्दन कटने, पक्षियों के घायल होने व बिजली के तारों में मांझा उलझने की घटनाएं हो रही है। लेकिन मकर संक्रांति के दिन पतंग अधिक उड?े पर उस दिन इस तरह की घटनाएं अधिक होने का खतरा बना रहता है।पिछले कई सालों में इस दिन सुबह से देर शाम तक बड़ी संख्या में पक्षियों के घायल होने व मौत होने और लोगों के हाथ व गर्दन कटने के मामले होते रहे हैं। ऐसे में इस बार इस तरह की घटनाएं नहीं हो उसे देखते हुए निगम की ओर से कार्रवाई तो की जा रही है लेकिन वह नाकाफी है।
प्रभावी कार्रवाई हो तभी लगेगी रोक
लोगों का कहना है कि जिस तरह से नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए बिना उससे छुटकारा पाना मुश्किल है। उसी तरह से चायनीज मांझा बेचने वालों से अधिक इसे सप्लाई करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। दादाबाड़ी निवासी रीना शर्मा का कहना है कि निगम व प्रशासन कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता करता है। जिससे न तो दुकानदारों पर असर हो रहा है और न ही लोगों पर। जब तक इसे स्रोत पर ही कार्रवाई नहीं होगी तब तक उसे रोक पाना मुश्किल है।
इनका कहना है
चायनीज मांझे के खिलाफ काफी समय से कार्रवाई की जा रही है। शहर के जितने भी पुराने व बड़े पतंग बेचने वाले हैं उन सभी की दुकानों व गोदामों पर जांच की गई। वहां अब कुछ भी नहीं मिल रहा है। या तो वे चोरी छिपे या अन्यज जगहों से बेच रहे हैं। बोगस ग्राहक बनाकर भेजने या सोशल मीडिया से सूचना पर कार्रवाई के दौरान भी बड़ी सफलता नहीं मिल रही है। वैसे जानकारी के अनुसार यह मांझा जुलाई अगस्त में ही आ जाता है। धीरे-धीरे सभी दुकानों पर पहुंच जाता है। प्रयास है कि इसके सप्लायरों पर या बड़े दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।।
- राकेश व्यास, सीएफओ, नगर निगम कोटा

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