जर्जर भवन ढ़ह रहे, जिम्मेदार अधिकारी मौन
शहर में अभी भी जर्जर मकानों पर नहीं हुई कार्रवाई
ठोस कार्रवाई नहीं होने से इस तरह के हादसे हो रहे हैं।
कोटा। शहर में बहुमंजिला बिल्डि़ंगों के गिरने का मंगलवार को तीन माह में दूसरा बड़ा हादसा हुआ है। इन हादसों के बाद भी सबक नहीं लेते हुए जिम्मेदार अधिकारी पुराने व जर्जर भवनों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में तीन माह पहले 7 फरवरी को एक नॉनवेज रेस्टोरेंट की बिल्डिंग धराशाही हो गई थी। इसका कारण उस बिल्डिंग के पास अन्य बिल्डिंग में चल रहा निर्माण कार्य बताया गया था। जिससे इस रेस्टोरेंट की बिल्डिंग में दबने से दो लोगों की मौत हो गई थी। वहीं एक महिला का पैर काटना पड़ा था। उस हादसे के बाद कुछ समय तक तो नगर निगम व केडीए प्रशासन हरकत में आया और अवैध निर्माण को नोटिस दिए। जर्जर मकानों व भवनों का सर्वे कर उन्हें मकान मालिक द्वारा या तो स्वयं गिराने या निगम के स्तर पर गिरवाकर खर्चा मकान मालिकों से लेने का आदेश जारी किया गया। लेकिन उस हादसे के कुछ समय बाद सभी जिम्मेदार विभागों ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की।इसी का नतीजा है कि मंगलवार को एक बार फिर से तीन मंजिला पुराने मकान के गिरने का हादसा हो गया। इस मकान में गनीमत रही कि वर्तमान में कोई नहीं रह रहा था। वरना पड़ा हादसा हो सकता था।
भीड़भाड़ वाला इलाका
प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया कि घौंसी मौहल्ले में जिस जगह यह मकान गिरा वह काफी भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है। हालांकि गली संकरी होने से वहां लोगों के निकलने के बाद यदि किसी पर मकान का मलबा गिरता तो भी कई लोगों की जान जा सकती थी। मकान गिरते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने मलबे व मकान के आस-पास किसी को भी जाने से रोक दिया। जिससे किसी को कोई चोट नहीं लगे। उसके बाद भी लोग रात तक वहीं डटे रहे।
सामने मकान से बनाया लाइव वीडियो
जिस समय यह मकान गिरा उस समय उसके सामने वाले मकान से एक बच्चे द्वारा उसका वीडियो बनाया जा रहा था। हादसे के बाद तेजी से वायरल हुए मकान गिरने के उस लाइव वीडियो में आवाज भी सुनाई दे रही है कि मैं वीडियो बना रहा हूं। साथ ही लोगों के चिल्लाने की आवाजें भी आ रही है। वहीं मकान में पहले छज्जा गिरने और उसके कुछ ही सैकंड में पूरा मकान ताश के पत्तों की तरह धराशाही होता दिख रहा है। हादसे में कई वाहन व सामान दबे हैं। वहीं आस-पास धार्मिक स्थान व अन्य मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
मकान गिरते ही मचा हाहाकार
जैसे ही मकान गिरा वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। सभी को लगा कि मकान के मलबे में कोई दबा है। ऐसे में आस-पास हाहाकार मच गया। लोग चिल्लाने लगे कि कोई दबा तो नहीं। काफी देर तक लोगों में व प्रशासन में भी आशंका बनी रही। लेकिन जांच के बाद निगम व पुलिस अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की कि मलबे में फिलहाल किसी के दबे होने की कोई जानकारी नहीं है। मकान में काम कर रहे महिला पुरुष श्रमिक व उनका एक बच्चा हादसे से पहले वहां से दूर हट गए थे।
मकान को लेकर विवाद ही स्थिति बनी
तीन मंजिला इस पुराने मकान के गिरने के बाद इसे लेकर मौके पर विवाद की स्थिति भी बनी। मौके पर एक मंगलमुखी पहुंची और उन्होंने दावा किया कि यह मकान उनकी गुरु रेखा का है। उन्होंने इस मकान की चाबी उन्हें दी थी। लेकिन वह हरिद्वार गई हुई थी। इस कारण से मकान की चाबी आयशा अंसारी को दे गई थी। जबकि किसी ने बताया कि यह मकान आयशा अंसारी का है। मंगलमुखी ने बताया कि वे हरिद्वार से आई तो उन्हें मकान गिरा हुआ मिला है। उनकी जानकारी के बिना ही मकान की मरम्मत का काम कराया जा रहा था। इस मकान को लेकर मौके पर विवाद की स्थिति भी देखने को मिली। जिसे मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने समझाइश से शांत कराया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मकान के टाइगर की जांच की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता मलबा हटाने व लोगों को सुरक्षित करना है।
अभी भी चिढ़ा रहे हैं पुराने व जर्जर मकान
शहर में अभी भी बड़ी संख्या में पुराने व जर्जर मकान जैसे के तैसे खड़े हुए हैं। यह प्रशासन को चिढ़ा रहे हैं। प्रशासन द्वारा पुराने शहर के सूरजपोल से मोखापाड़ा, कैथूनीपोल से लालबुर्ज तक और नयापुरा व स्टेशन समेत कई जगह पर पुराने व जर्जर मकानों का सर्वे कराया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई के दावे भी किए गए लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिससे इस तरह के हादसे हो रहे हैं।

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