गरीब बनकर 65 लाख का राशन डकार गए सरकारी कर्मचारी

जिले में 917 कार्मिकों से सरकार ने वसूली रकम

गरीब बनकर 65 लाख का राशन डकार गए सरकारी कर्मचारी

लापरवाही के चलते यह लोग योजना से अपना नाम नहीं कटवा सके और अपात्र होने के बावजूद लाभ लेते रहे।

कोटा। सरकार से मोटी पगार लेने के बावजूद कोटा जिले में 917 सरकारी कर्मचारी गरीब बनकर खाद्य सुरक्षा योजना में 65 लाख का राशन डकार गए। गरीबों के हक का राशन डकारने वाले सरकारी कर्मचारियों से रसद विभाग ने वसूली कर रकम सरकारी खजाने में जमा करवा दी है। राजस्थान में राष्टÑीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत बीपीएल और एपीएल को मिलने वाले राशन के गेहूं उठाने के मामले में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के मार्फत सरकार ने कुल 85 हजार सरकारी कर्मचारियों से वसूली लगभग पूरी कर ली है। इनसे करीब 98 करोड़ रुपए गेहंू के पेटे सरकार के खाते में जमा करवाए जा चुके हैं। कोटा जिले में भी 917 कर्मचारियों से करीब 65 लाख रुपए की वसूली की गई है।

डाटा नहीं होने से कर्मचारियों की हुई मौज
जानकारी के अनुसार योजना वर्ष 2013-14 में केन्द्र सरकार के माध्यम से शुरू हुई थी, जिसमें पहले अधिकतम 35 किलो गेंहू राशन डीलर के मार्फत पात्र परिवारों को दो रुपए और बाद में एक रुपए किलो की दर पर उपलब्ध कराया गया था ताकि कोई भूखा ना सोए। योजना में सरकारी नौकरी में होने की जानकारी का डाटा नहीं होने के कारण कर्मचारी भी इस योजना में गेहंू लेते रहे। योजना में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के गेहंू लेने की जानकारी वर्ष 2020-21 में सामने आई थी। इसके बाद पूरा डाटा जुटाकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति ने राजस्थान करीब 85 हजार कर्मचारियों की सूची तैयार की। इनमें कोटा जिले के 917 कर्मचारी भी शामिल थे। एफसीआई के तय दरों के मुताबिक कर्मचारियों से 27 रुपए प्रति किलो के हिसाब से राशि वसूली गई है। संबंधित विभागों को इनसे वसूली के लिए आदेश जारी हुए थे। अब जाकर यह राशि वसूली जा सकी है।

मिलीभगत का खेल या सरकारी लापरवाही
जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जोड़ने से पहले संबंधित हल्का पटवारी व ग्राम विकास अधिकारी को रिपोर्ट करनी होती है। इन्हीं की रिपोर्ट के आधार पर पात्र मान कर खाद्य सुरक्षा योजना में परिवार को शामिल किया जाता है। फिर भी सैंकड़ों सरकारी कर्मचारियों का खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल होना मिलीभगत व सरकारी लापरवाही को इंगित करता है। हालांकि यह बात भी सामने आई है कि कई ऐसे लोग भी है जो योजना में शामिल हुए तब योजना के लिए पात्र थे, लेकिन बाद में या तो सरकारी नौकरी लग गई। या फिर किन्ही अन्य कारणों से अपात्र हो गए। लापरवाही के चलते यह लोग योजना से अपना नाम नहीं कटवा सके और अपात्र होने के बावजूद लाभ लेते रहे।

अपात्र थे, फिर भी उठाया राशन
योजना के तहत परिवार का कोई भी एक व्यक्ति आयकर दाता होने, सरकारी या अर्द्व सरकारी कर्मचारी होने, चौपहिया वाहन धारक,परिवार के सदस्यों के नाम लघु कृषक के लिए निर्धारित सीमा से अधिक कृषि भूमि, ग्रामीण क्षेत्रों में दो हजार वर्गफीट से अधिक का रिहायशी पक्का मकान होने, नगरपालिका क्षेत्र में डेढ़ हजार वर्ग फीट से बड़ा पक्का मकान व व्यवसायी परिसर है तो व्यक्ति योजना के लिए अपात्र होता है। सरकारी कर्मचारी ऐसे में अपात्र श्रेणी मे थे लेकिन नौकरी लगने के बाद सूचना को अपडेट नहीं कराया गया, ऐसे में राशन उठता रहा। 

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अपात्र लोगों द्वारा खाद्य सुरक्षा का योजना का लाभ उठाने से जरूरतमंद परिवार इससे वंचित हो जाते हैं। सरकार को इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।
- मुन्नी बाई, लाभार्थी

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खाद्य सुरक्षा योजना के तहत कोटा जिले में भी सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपात्र होने के बावजूद गेहूं लेने के मामले सामने आए थे। इस मामले में सभी कर्मचारियों से बाजार दर यानी 27 रुपए किलो के हिसाब से वसूली कर ली गई है। 
- गोविंद कुमार, प्रवर्तन निरीक्षक, रसद विभाग कोटा

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