पैंथरों की हरकत पर नजर रखेगा जीएसएस रेडियो कॉलर

शहर में बढ़ते मूवमेंट को लेकर वन विभाग ने किया निर्णय

पैंथरों की हरकत पर नजर रखेगा जीएसएस रेडियो कॉलर

मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में पैंथरों की संख्या करीब 100 तक है।

कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में तेंदुआ यानि पैंथर की तादात लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में कोटा के शहरी क्षेत्र में भी अब इनकी आवाजाही होने लगी है। इस कारण वन विभाग की ओर शहर में इनके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए पैंथरों के गले में स्वदेशी जीएसएस रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। पैंथर एक चालाक और ताकतवर शिकारी है, जो दिन के उजाले और रात के अंधेरे में भी शिकार करने में माहिर है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में अब इनकी संख्या करीब 100 तक पहुंच चुकी है, जो अच्छे जंगल और भरपूर शिकार की वजह से तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ये तेंदुए अब जंगल की सीमा पार कर कोटा शहर की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। तेंदुए (पैंथर) अक्सर शहर के थर्मल प्लांट, राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी और श्रीनाथपुरम जैसे इलाकों में नजर आ जाते हैं।

इन पैंथरों पर ही लगेगा रेडियो कॉलर
तेंदुओं के बढ़ते मूवमेंट से इंसानों और पैंथरों के बीच टकराव का खतरा बढ़ रहा है, इसलिए वन विभाग ने एक सरल लेकिन प्रभावी कदम उठाया है। कुछ चुनिंदा पैंथरों के गले में भारत में ही बना हल्का जीएसएम रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। यह छोटा-सा कॉलर मोबाइल नेटवर्क से काम करता है और पैंथर की हर हरकत को ट्रैक कर बताता है कि वो शहर की तरफ क्यों और कब जा रहे हैं, अगर यह योजना सफल हुई, तो इससे न सिर्फ पैंथरों की सुरक्षा होगी, बल्कि लोगों को भी खतरे से बचाया जा सकेगा। उपवन संरक्षक (डीसीएफ) मुथु सोमासुंदरम ने बताया कि सभी पैंथरों पर कॉलर लगाना संभव नहीं है, इसलिए केवल उन पैंथरों को कॉलर लगाया जाएगा जो बार-बार शहरी या आबादी वाले क्षेत्रों में घूमते हैं या मनुष्यों से टकराव का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य शहरी सीमा में विचरण करने वाले पैंथरों की निगरानी करना है। इससे उनके मूवमेंट रूट का पता चलेगा और यह भी समझ आएगा कि वे शहर की ओर क्यों आ रहे हैं।

पैंथर की लोकेशन होगी रीयल-टाइम में ट्रैक
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इसके लिए बेंगलुरु की कंपनी आर्कटुरस द्वारा विकसित स्वदेशी जीएसएम बेस्ड रेडियो कॉलर का परीक्षण शुरू किया गया है। कंपनी ने ट्रायल के लिए एक कॉलर मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व को उपलब्ध कराया है। इस कॉलर की कीमत 40 से 50 हजार रुपये है, जो विदेशी कॉलरों की तुलना में बहुत किफायती है। यह रेडियो कॉलर पूरी तरह मोबाइल नेटवर्क यानी जीएसएम पर आधारित है। इसमें एक सिम कार्ड लगा होता है, जो पैंथर की लोकेशन को रीयल-टाइम में ट्रैक करने में मदद करता है। यदि मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता, तो यह काम नहीं करता, लेकिन शहरी इलाकों के आसपास नेटवर्क अच्छा होने से यह काफी प्रभावी साबित होगा। इस कॉलर का वजन केवल 500 ग्राम के आसपास है, जो पैंथर के गले के आकार के अनुरूप है। वहीं, टाइगरों के लिए इस्तेमाल होने वाला रेडियो कॉलर जीपीएस बेस्ड होता है, जिसका वजन 1 किलो से अधिक है और कीमत 7 से 8 लाख रुपए तक पहुंच जाती है। जीपीएस कॉलर सैटेलाइट के जरिए काम करता है और मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं होता है। पैंथर छोटे आकार के होते हैं, इसलिए उनके लिए हल्का और सस्ता कॉलर ज्यादा उपयुक्त है।

शहर में इन क्षेत्रों में पैंथरों का मूवमेंट
कोटा शहर में पैंथरों का मूवमेंट कई जगहों पर नियमित रूप से देखा जा रहा है। इनमें थर्मल पावर प्लांट के आसपास, राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी के नजदीक, श्रीनाथपुरम इलाका और आर्मी एरिया प्रमुख हैं। अभी तक पैंथरों से कोई बड़ा कॉन्फ्लिक्ट नहीं हुआ है, लेकिन सतर्कता जरूरी है। यदि कोई घटना होती है, तो पैंथर को ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) करके इस रेडियो कॉलर को उसके गले में पहना दिया जाएगा। इससे उसकी आगे की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फिलहाल यह योजना परीक्षण चरण में है। यदि ट्रायल सफल रहा तो और अधिक जीएसएम बेस्ड स्वदेशी कॉलर मंगाए जाएंगे। यह पूरी तरह भारतीय तकनीक है. यदि सफल हुई तो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। पुरानी गणना के अनुसार मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 95 से 100 पैंथर थे, लेकिन यह आंकड़ा कुछ साल पुराना है। वर्तमान में पैंथर सेंसस चल रहा है और मई तक नई रिपोर्ट आने की उम्मीद है। संभावना है कि संख्या में इजाफा हुआ होगा।पहले भैंसरोडगढ़ सेंचुरी को रिजर्व में शामिल नहीं किया गया था, अब इसे जोड़कर गणना हो रही है।

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मुकुंदरा रिजर्व में अच्छा हैबिटेट और पर्याप्त शिकार की उपलब्धता पैंथरों की संख्या बढ़ाने में मदद कर रही है। यह नई पहल स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे पैंथर और मनुष्य के बीच सामंजस्य बढ़ेगा और दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- मुथु सोमासुंदरम, उपवन संरक्षक

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