अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : हौसलों की उड़ान हो तुम, सपनों की पहचान हो तुम
बड़े सपने देखने का साहस हमेशा बनाए रखें
कई महिलाएँ चुनौतियों को पार कर अपने सपनों को साकार करती हैं।
कोटा।"हौसलों की उड़ान से ही मंजिलें मिलती हैं,रास्ते आसान हों तो पहचान नहीं बनती।" महिलाओं की सफलता के पीछे अक्सर संघर्ष, धैर्य और मजबूत इरादों की कहानी छिपी होती है। घर, परिवार, समाज और करियर की जिम्मेदारियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता। फिर भी कई महिलाएँ चुनौतियों को पार कर अपने सपनों को साकार करती हैं। महिला दिवस के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने शहर की ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाओं से बातचीत की और जाना कि उन्होंने अपनी मंजिÞल तक पहुँचने के लिए किन संघर्षों और चुनौतियों का सामना किया। उनकी जुबानी सुनिए सफलता की यात्रा।
महिला जीवन की चुनौतियां और संकल्प की शक्ति
महिला होने के नाते जीवन के हर पड़ाव पर अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बचपन में अक्सर ऐसा होता है कि परिवार में भाई को अधिक प्राथमिकता दी जाती है, जबकि लड़कियों पर कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी जाती हैं, कैसे रहना है, क्या पहनना है और कहाँ जाना है। मेरे जीवन में भी ऐसे अनुभव रहे। जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, चुनौतियों का स्वरूप भी बदलता गया। घर की चौखट से बाहर निकलकर नौकरी की ओर कदम बढ़ाने पर कई तरह के आक्षेप और सवाल सामने आए। फिर भी जब मन में दृढ़ निश्चय हो कि हमारा विचार सही है और हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। चुनौतियों को मैंने हमेशा सकारात्मक रूप में लिया, क्योंकि उनसे सीखने और खुद को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर मिलता है। आज जिस मुकाम पर हूं, उसमें सभी का हाथ है। जब माता-पिता के पास थे तो उनकी भूमिका सबसे ज्यादा रही। मैं बीकानेर की रहने वाली हूँ। मेरे पिता का हमेशा मानना था कि अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए और आत्मनिर्भर बनना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने मुझे घर से दूर वनस्थली विद्यापीठ भेजा, जहाँ से मैंने स्कूल से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई पूरी की। वहाँ की शिक्षा ने मेरे जीवन की मजबूत नींव तैयार की। मेरी माँ स्वयं पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन हम सभी को पढ़ाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। पति से भी जीवन में कई महत्वपूर्ण बातें सीखने का अवसर मिला और आज मैं जिस मुकाम पर हूँ, उसमें परिवार के समर्थन की बड़ी भूमिका रही है।
महिला दिवस पर संदेश
बच्चियां और महिलाएं अपनी प्रतिभा को पहचानें, बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, समर्पण और साहस के साथ आगे बढ़ें। साथ ही उन्हें वित्तीय प्रबंधन, सामुदायिक सहयोग और नेतृत्व की जिम्मेदारियों को भी समझना होगा। बाधाएं जीवन में आती हैं, लेकिन सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर एक स्थायी और उज्ज्वल भविष्य बनाया जा सकता है।
-डॉ. विमला डुकवाल, कुलगुरु, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा
फॉरेंसिक विज्ञान में बनाई मजबूत पहचान
मैंने वर्ष 1998 में इस क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया। उस समय महिलाओं और लड़कियों में इस क्षेत्र के प्रति जागरूकता बहुत कम थी। फॉरेंसिक विज्ञान का कार्य केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई बार क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन के लिए किसी भी समय ड्यूटी देनी पड़ती है। कई घटनास्थल बेहद भयावह होते हैं और कई बार गहन जंगलों या एकांत स्थानों पर भी जांच करनी पड़ती है। ऐसे में वैज्ञानिक साक्ष्यों को संकलित करते समय धैर्य, साहस और समझदारी बेहद जरूरी होती है। समाज में जब रेप जैसे जघन्य अपराध सामने आते हैं, तो एक महिला होने के नाते ये दृश्य मन को गहराई से झकझोर देते हैं। आज के समय में मानसिक, शारीरिक और तकनीकी रूप से मजबूत बने बिना आगे बढ़ना संभव नहीं है, इसलिए हर चुनौती का दृढ़ता से सामना करना पड़ता है।
पुरुष प्रधान समाज में बिना किसी समझौते के आगे बढ़ना भी अपने आप में एक चुनौती रहा है। कई बार परिवार और समाज की पारंपरिक सोच भी सामने आती है। समय के साथ कदम मिलाने की कोशिश में कई बार परिवार और बच्चों को उतना समय नहीं दे पाते, जितना देना चाहते हैं। वहीं कार्यस्थल पर भी जब एक महिला अधिकारी उच्च पद पर होती है, तो कई बार पुरुष सहकर्मियों और अधीनस्थों के लिए उसे सहज रूप से स्वीकार करना आसान नहीं होता। फिर भी निरंतर मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता बनाता है। मैं अपनी सोच और मूल्यों का श्रेय अपनी मां शांति देवी, पिता भरत सिंह, सास प्रेम खन्ना और पति राजेश खन्ना को देना चाहूंगी। परिवार ही वह आधार है, जिससे जुड़कर हम समाज के लिए भी बेहतर कार्य कर सकते हैं।
महिला दिवस पर संदेश
एक सशक्त महिला या बालिका को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मन और तन दोनों को मजबूत बनाना होगा। निरंतर प्रयास के साथ जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। विशेष रूप से अपराध के मामलों में महिलाओं को खुद को केवल पीड़ित न मानते हुए साहस के साथ आगे आना चाहिए और साक्ष्य प्रस्तुत करने में सहयोग देना चाहिए। इससे अपराधियों में भय पैदा होगा और उन्हें उनके अपराध की सजा भी मिलेगी।
-डॉ. राखी खन्ना, एडिशनल डायरेक्टर रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी कोटा रेंज
संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास से सफलता का मार्ग
जी वन में चुनौतियों का सामना हर व्यक्ति को करना पड़ता है। मेरे जीवन में भी संघर्ष मुख्य रूप से पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े रहे। पढ़ाई के दौरान कई बार असफलताएँ भी मिलीं, लेकिन ऐसे समय में धैर्य और दृढ़ निश्चय सबसे अधिक जरूरी होता है। मेरे माता-पिता का हमेशा पूरा समर्थन मिला और उन्होंने हर परिस्थिति में मुझे प्रेरित किया। यूपीएससी की तैयारी के दौरान मेरा चयन तीसरे प्रयास में हुआ। इससे पहले के प्रयास में केवल एक अंक से चयन छूट गया था, उस समय बहुत निराशाजनक लगता था। लेकिन परिवार के सहयोग और अपने धैर्य की वजह से मैंने हिम्मत नहीं हारी लगातार अपने प्रयास जारी रखे। हमेशा यही कोशिश रही कि मनोबल बनाए रखा जाए और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
-कॉलेज के समय से ही मेरा लक्ष्य था कि मुझे सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में जाना है। मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बिजनेस स्टडीज में स्नातक किया और उसी दौरान इस दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। इस पूरे सफर में मेरे माता-पिता की प्रेरणा सबसे बड़ी ताकत रही। जब हम मेहनत करते हैं और हमारे काम से हमारे अपने लोग खुश होते हैं, तो उससे और अधिक ऊर्जा मिलती है। आज भी उनका मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जीवन में हर भूमिका को संतुलन के साथ निभाना भी बहुत जरूरी है। जब मैं काम पर होती हूँ तो पूरी तरह अपने कार्य पर ध्यान देती हूँ, और जब घर पर होती हूँ तो परिवार को समय देने की कोशिश करती हूँ। कई बार काम का दबाव होता है और कभी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं, लेकिन इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे महत्वपूर्ण है।
महिला दिवस पर संदेश
महिलाओं और युवतियों के लिए मेरा संदेश है कि सबसे पहले खुद पर विश्वास रखें। मेहनत और लगन के साथ काम करें, क्योंकि इंसान की सबसे बड़ी सीमा उसकी सोच होती है। यदि आप आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तो आप जो चाहें वह हासिल कर सकते हैं।
-चारु शंकर, एसडीएम रामगंजमंडी
संघर्ष, संकल्प और बड़े सपनों की उड़ान
सिविल सेवा में आने से पहले का मेरा सफर संघर्ष और धैर्य से भरा रहा। यूपीएससी की परीक्षा मैंने चौथे प्रयास में सफलतापूर्वक पास की। इन चार वर्षों की तैयारी काफी मेहनत और धैर्य की परीक्षा लेने वाली रही। कई बार ऐसे क्षण आए जब निराशा भी हुई। दो बार मैंने परीक्षा दी, एक बार इंटरव्यू तक पहुँची, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया। ऐसे झटके किसी भी अभ्यर्थी के लिए कठिन होते हैं। कई बार हम योजनाएँ बनाते हैं, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं मिलते। ऐसे समय में परिवार और समाज का दबाव भी महसूस होता है और कई लोग बीच रास्ते में हार मान लेते हैं।मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत मेरा परिवार रहा। उन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि जितना समय चाहिए, उतना लेकर पूरी लगन से तैयारी करो। इसी समर्थन और आत्मविश्वास के साथ मैंने चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त की। मेरे पिता राज्य सरकार में कार्यरत थे और उन्हें देखकर ही मुझे शुरूआत से ही कुछ करने की प्रेरणा मिली। बाद में जब मैंने कॉपोर्रेट क्षेत्र में काम करना शुरू किया, तब मुझे एहसास हुआ कि निजी क्षेत्र में पब्लिक इंटरफेस और सामाजिक प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है। वहीं से यह विचार और मजबूत हुआ कि सरकारी व्यवस्था में काम करके समाज पर अधिक सकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है।मेरी प्रेरणा मेरी माँ और बहनें रही हैं। उन्होंने हमेशा यही सिखाया कि जो भी काम करें, पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करें, क्योंकि हर काम के अपने सकारात्मक और नकारात्मक पहलू होते हैं।
महिला दिवस पर संदेश
अगर आपको लगता है कि आप कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो शुरूआत करने से कभी न डरें। अपने सपनों को साकार करने के लिए पहला कदम उठाइए। कहीं न कहीं से सहयोग अवश्य मिलेगा। सबसे जरूरी है कि बड़े सपने देखने का साहस हमेशा बनाए रखें।
-आराधना चौहान, प्रशिक्षु आईएएस

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