हॉर्मुज संकट से थमी सुगंध की सप्लाई, खाड़ी देशों के इत्र 15-20% हुए महंगे
पैकेजिंग और कच्चे माल की कमी
कॉस्मेटिक उत्पादों की आपूर्ति भी प्रभावित।
कोटा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज मार्ग पर शिपिंग बाधाओं का असर अब कोटा सहित देश के बाजारों में साफ दिखने लगा है। खासकर खाड़ी देशों से आने वाले इत्र (परफ्यूम) और कॉस्मेटिक उत्पादों की सप्लाई प्रभावित होने से इनकी कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया है। व्यापारियों के अनुसार यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। जानकारी के अनुसार ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के चलते हॉर्मुज स्ट्रेट पर समुद्री गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। यह मार्ग दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का करीब 20-25 प्रतिशत वहन करता है। ऐसे में शिपिंग में देरी और लागत बढ़ने से इसका सीधा असर आयातित वस्तुओं पर पड़ रहा है।
आपूर्ति में कमी और बढ़ी आयात लागत
खाड़ी देशों से यहां पर प्रीमियम कॉस्मेटिक्स, हाई-एंड मेकअप, आॅर्गेनिक और हर्बल स्किन केयर उत्पाद, क्रीम, सीरम और आवश्यक तेल बड़ी मात्रा में आयात होते हैं। इसके अलावा अरबी शैली के परफ्यूम, कस्तूरी आधारित इत्र, अत्तर और गुलाब जल की भी विशेष मांग रहती है। पारंपरिक और प्राकृतिक उत्पादों का आयात भी बड़ी मात्रा में होता है, जो अब प्रभावित हो रहा है। आपूर्ति में कमी और आयात लागत बढ़ने के कारण ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर विदेशी कॉस्मेटिक्स और इत्र की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। कई आयातक और विक्रेता अनिश्चितता के चलते नए आॅर्डर टाल रहे हैं या सीमित मात्रा में मंगा रहे हैं। पहले जारी आॅर्डर की डिलीवरी भी प्रभावित हो रही है।
ग्राहकों को चुकानी पड़ रही अधिक कीमत
कोटा के व्यापारियों का कहना है कि खाड़ी देशों से आने वाले इत्र की सप्लाई प्रभावित होने से थोक और खुदरा दोनों स्तर पर कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ग्राहकों को अब पहले की तुलना में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है, वहीं दुकानदारों को भी सीमित स्टॉक में काम चलाना पड़ रहा है। खाड़ी देशों से भारत में बड़ी मात्रा में प्रीमियम कॉस्मेटिक्स आयात किए जाते हैं। इन उत्पादों की खास बात यह है कि इनमें इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे पदार्थ (जैसे एसेंशियल आॅयल, फ्रेगरेंस कंपाउंड्स) भी उसी क्षेत्र से आते हैं, इसलिए सप्लाई रुकते ही उत्पादन और कीमत दोनों प्रभावित हो रहे हैं। यदि हॉर्मुज मार्ग पर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले समय में कॉस्मेटिक्स और इत्र के दामों में और उछाल देखने को मिल सकता है।
पैकेजिंग और कच्चे माल की कमी
कॉस्मेटिक उद्योग सिर्फ तैयार माल पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि इसकी पैकेजिंग सामग्री जैसे ग्लास बोतलें, पंप, प्लास्टिक कंटेनर और केमिकल बेस भी आयात होते हैं। हॉर्मुज मार्ग पर बाधा के कारण इनकी उपलब्धता घट गई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर लोकल ब्रांड्स पर भी पड़ा है, जिन्हें अब महंगे कच्चे माल के कारण अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ गए हैं। वैकल्पिक मार्ग अपनाने से डिलीवरी समय भी बढ़ गया है। पहले जो माल 10-12 दिनों में पहुंच जाता था, अब उसे 20-25 दिन लग रहे हैं। इससे बाजार में उपलब्धता घटने के साथ ही खुदरा कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
पहले जहां माल 10-12 दिन में आ जाता था, अब 20-25 दिन लग रहे हैं। इससे बाजार में कमी बनी हुई है और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। कीमतें बढ़ने के चलते अब ग्राहक महंगे इम्पोर्टेड कॉस्मेटिक्स की जगह लोकल या किफायती विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। हर्बल और देसी ब्रांड्स की मांग में हल्की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
-नितिश पराशर, इत्र विक्रेता

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