चीन की घटती आबादी और बढ़ती तकनीकी ताकत: भारत के लिए चुनौती

रोजगार बनाम तकनीकी निवेश की चुनौती

चीन की घटती आबादी और बढ़ती तकनीकी ताकत: भारत के लिए चुनौती

चीन की सरकार ने टेक्नोलॉजी और शिक्षा को एक साथ जोड़ा वहां कई कंपनियों में रोबोट 24 घंटे काम करते है ।

कोटा। चीन की जनसंख्या में लगातार गिरावट आ रही है, लेकिन यह उसके लिए कमजोरी नहीं बल्कि एक नई ताकत बनती जा रही है। पहले बड़ी आबादी को आर्थिक शक्ति माना जाता था, वहीं अब चीन तकनीक और ऑटोमेशन के जरिए इस कमी को पूरा कर रहा है। चीन ने समय रहते समझ लिया कि भविष्य मशीनों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, इसलिए वह तेजी से रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीकों में निवेश कर रहा है। चीन को आबादी कम होने से काम देने की कोई दिक्कत नहीं है। चीन की कई बड़ी कंपनियों में रोबोट 24 घंटे, सातों दिन काम कर रहे हैं जब कि एक इंसान 8 घंटे ही काम करता है। शियोमी कंपनी में 50% रोबोट काम कर रहे हैंं। इससे उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और लागत भी कम होती है। जनसंख्या कम होने के बावजूद चीन को श्रमिकों की कमी महसूस नहीं हो रही ।

तकनीक के दम पर अमेरिका को चुनौती
चीन की सरकार ने टेक्नोलॉजी और शिक्षा को एक साथ जोड़ा है। “Made in China 2025” जैसी नीतियों के तहत AI, 5G, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर में भारी निवेश किया गया है, कंपनियों को सब्सिडी, जमीन और टैक्स में राहत दी जाती है। फैसले तेजी से लागू किए जाते हैं। इसी रणनीति का हिस्सा है कि बच्चों को स्कूल से ही STEM, कोडिंग, रोबोटिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि भविष्य के इंजीनियर और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट तैयार हों और देश की तकनीकी ताकत और मजबूत हो।

भारत के सामने बढ़ती जनसंख्या एक चुनौती
भारत की जनसंख्या अभी अगले 20 वर्षों तक बढ़ती रहेगी। इससे रोजगार, संसाधन और विकास को लेकर दबाव बना रहेगा। एक बड़ी चुनौती यह भी होगी कि सरकार रोजगार दे या तकनीक में निवेश करे, क्योंकि एआई और रोबोटिक्स के बढ़ने से पारंपरिक नौकरियां कम हो सकती हैं। ऐसे में भारत के सामने दोहरी चुनौती है—जनसंख्या का प्रबंधन और तकनीकी विकास में तेजी। यदि सही संतुलन नहीं बनाया गया, तो चीन से मुकाबला करना भविष्य में और भी कठिन हो सकता है। ऐसे में क्या भारत रोजगार, संसाधनों , टेक्नोलॉजी और विकास के बीच सही संतुलन बना पाएगा, या भविष्य में चीन से मुकाबला करना मुश्किल हो जाएगा? इस विषय पर शहर के प्रबुद्ध लोगों की राय ली गई।

चीन के लोग “नेशन फर्स्ट” को रख कर काम करते हैं, इसलिए वे तकनीक और जनसंख्या नियंत्रण में आगे हैं। युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के प्रति जागरूक करना होगा। नई तकनीकों से तो रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हम जिम्मेदारी, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना अपनाएँ तभी हम आगे बढ़ सकते हैं।
- प्रदीप दाधीच, निदेशक पार्श्वनाथ ग्रुप

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चीन से मुकाबला चुनौतीपूर्ण होगा वहां लोग बहुत मेहनती हैं। भारतीय भी मेहनती है, लेकिन नई पीढ़ी मोबाइल की लत में फंसी हुई है । भारत में भी चीन जैसी योजनाबद्ध और प्रगतिशील व्यवस्था हो, तो हम चीन को पीछे छोड़ सकते हैं। हमें अपनी नई पीढ़ी को सही दिशा में लगाना और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना होगा।
-महेश गुप्ता, निदेशक, शिवज्योति स्कूल

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भारत का तकनीकी और आर्थिक विकास पहले भी चुनौतीपूर्ण रहा है ,भविष्य में भी रहेगा। सुधार की सबसे बड़ी जरूरत शिक्षा व्यवस्था में है। चीन की तरह वोकेशनल प्रशिक्षण पर जोर दिया जाए, तो लोगों को कौशल आधारित बनाया जा सकता है। भारत में प्रतिभाशाली छात्र विदेश चले जाते हैं, जबकि चीन में उच्च शिक्षा लेकर लोग देश के विकास में योगदान देते हैं।
-डॉ. अजीत धाकड़, डायरेक्टर धाकड़ हॉस्पिटल, कुन्हाड़ी

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भारत में जनसंख्या के लिहाज से मुकाबला कठिन है। सख्त जनसंख्या नियंत्रण और मजबूत शिक्षा आवश्यक हैं। इससे तकनीक और विकास में सुधार होगा। युवाओं में जिम्मेदारी की भावना जागृत करनी होगी। मोबाइल और सोशल मीडिया में व्यस्त युवा सही कौशल नहीं सीख पाते। उच्च शिक्षा के बाद कई छात्र विदेश चले जाते हैं, जो देश के लिए चिंता का विषय है।
-प्रसन्न माहेश्वरी, ओनर, फूड टाउन बाय माहेश्वरी

भारत में भी एआई और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है, और हमारा युवा निश्चित रूप से आगे बढ़ने की क्षमता रखता है। चुनौतियां बहुत हैं। भारत में भी एडवांस लर्निंग कोर्सेज और ऐसे इंस्टीट्यूट खुलने चाहिए जिससे नई तकनीकों का ज्ञान मिल सके और युवा भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
-देवेंद्र कौर नरूला, प्रिंसिपल, किड्स कैसल स्कूल

हमारे यहाँ नीतियों में अधिक लचीलापन होने के कारण उनका सही पालन नहीं हो पाता, निष्पक्षता प्रभावित होती है। सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध हों, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। हमारे आईआईटी जैसे संस्थानों के छात्र प्रतिभाशाली हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त संसाधन और सुविधाएँ नहीं मिल पातीं। निरंतर प्रयासों से ही हम भविष्य में चीन की बराबरी कर सकते हैं।
-डॉ. प्रियदर्शना जैन, प्राचार्य जैन दिवाकर कमला महाविद्यालय

भारत की जनसंख्या बोझ नहीं, बल्कि सबसे बड़ा संसाधन बन सकती है। सही दिशा, शिक्षा और प्रशिक्षण से इसे ताकत में बदला जा सकता है। भारतीयों की प्रतिभा दुनिया भर में साबित है, “मेक इन इंडिया” जैसे प्रयासों के साथ इनक्यूबेशन नवाचार और कौशल विकास बढ़ाने से देश आत्मनिर्भर बन सकता है। सबसे बड़ी चुनौती मानसिकता की है,हमें खुद पर और देश पर भरोसा करना होगा।
- सीए ख्याति भंडारी,सीआईसीएएसए अध्यक्ष, आईसीएआई की कोटा शाखा

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