टावर ऑफ लिबर्टी को रोशन रखना बना बड़ी चुनौती, लाइटें पिछले कई महीनों से बंद

कई बार हो चुकी केबल चोरी

टावर ऑफ लिबर्टी को रोशन रखना बना बड़ी चुनौती, लाइटें पिछले कई महीनों से बंद
ऊपरी हिस्से तक पहुंच न होने से लाइट चालू करना मुश्किल है।

कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर शहर के मध्य एरोड्राम चौराहे पर टावर ऑफ लिबर्टी को बनाया गया लेकिन इसे रोशन रखना अब विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। टावर की लाइटें पिछले कई महीनों से बंद हैं। जिससे यहां अंधेरा पसरा हुआ है। तत्कालीन नगर विकास न्यास(केडीए) की ओर से शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के साथ ही चौराहों का विकास व सौन्दर्यीकरण कराया गया। इसी के तहत एरोड्राम चौराहे पर अंडरपास बनाया गया। इसके बीच में टावर ऑफ लिबर्टी का निर्माण किया गया। 

कोरोना काल में हुए इस कार्य के तहत जहां करीब 50 करोड़ की लागत से तो चौराहे पर अंडरपास बनाया गया और 25 करोड़ की लागत से टावर ऑफ लिबर्टी का निर्माण कराया या। सुंदरता के साथ ही आकर्षक बनाने के लिए यहां तीन बड़े टावर जिनकी ऊंचाई 32 मीटर, 38 मीटर व 40 मीटर है। इन पर सात तरह ही इफेक्ट लाइटिंग लगाई गई थी। करीब दो कि.मी. दूसर से ही चौराहा और इसकी लाइटिंग नजर आती है। विशेष अवसरों पर तो यह तिरंगे रंग में और अलग-अलग रंग बदलते हुए लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। झालावाड़ रोड हाइवे होने से कोटा शहर ही नहीं बाहर से आने वाले लोग भी इसकी लाइटिंग को देखकर बिना फोटो खींचे नहीं रह पाते हैं।लेकिन हालत यह है कि शहर के बीच इस आकर्षक स्थल की लाइटें पिछले काफी समय से बंद हैं। जिससे इसकी सुंदरता पर ग्रहण लगा हुआ है।

लाइटें बंद होने पर चालू करना मुश्किल
टावर ऑफ लिबर्टी को बनाते समय इस पर लगाई गई लाइटों का सिस्टम इस तरह से किया गया है कि नीचे तो इसकी केबल व पैनल दिया गया। जबकि इसके अलग-अलग फ्लोर पर ऐसी व्यवस्था की गई कि लाइट बंद होने पर वहां से ही उसे सही कर चालू किया जा सकता है। लेकिन इसके ऊपरी हिस्से में जाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। जिससे हर बार लाइटें बंद होने पर उसे चालू करना काफी मुश्किल होता है।

पेड़ा बांधने व खोलने पर 4 लाख का खर्चा
जानकारों के अनुसार शुरुआत में इस चौराहे व टावर का ओएंडएम किया हुआ था। जिससे जितनी बार भी लाइटें बंद हुई संवेदक फर्म द्वारा उन्हें सही कराया गया। लेकिन हालत यह है कि एक बार लाइट चालू करने के लिए टावर के ऊपरी हिस्से तक पहुंचने के लिए लोहे व लकड़ी का पेड़ा बांधना पड़ता है। जिसे बांधने में 15 दिन व खोलने में 10 दिन का समय लगता है। साथ ही कई दिन तक लाइटों की ट्रायल की जाती है। ऐसे में एक बार पेडा बांधकर लाइटें चालू करने पर करीब 4 लाख रुपए खर्च होना बताया जा रहा है। इस कारण से संवेदक फर्म ने कुछ समय तो इन लाइटों को सही किया लेकिन अब संवेदक फर्म ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। जिससे केडीए प्रशासन अभी तक इन लाइटों को चालू नहीं कर सका है।

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कई बार हो चुकी केबल चोरी
सूत्रों के अनुसार टावर ऑफï लिबर्टी की लाइटों की नीबे लगी केबल व पैनल कई बार चोरी हो चुके हैं। जिनके संबंध में केडीए की ओर से पुलिस में कई बार शिकायत दी जा चुकी है। लेकिन न तो चोरों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही लाइटें चालू। नतीजा शहर के बीच का यह आकर्षण अंधेरे में डूबा हुआ है।

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इनका कहना है
एरोड्राम के टावर की लाइटें लम्बे समय से बंद हैं। मैने भी इन्हें देखा है। इन लाइटों को चालू करने के संबंध में अधिकारियों से चर्चा भी हो चुकी है। इन लाइटों को चालू करने के लिए अलग सिस्टम पर विचार किया जा रहा है। जिससे बार-बार ऊपर की तरफ नहीं जाना पड़े। नीचे से ही स्थायी समाधान हो सके। शीघ्र ही इन लाइटों को चालू करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-बचनेश कुमार अग्रवाल, आयुक्त कोटा विकास प्राधिकरण

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