हाड़ौती के 52 में से 51 सरकारी कॉलेजों में पीटीआई नहीं, खेल सप्ताह के नाम पर चम्मच दौड़ व कुर्सी दौड़
महाविद्यालयों में स्पोर्ट्स एजुकेशन के बुरे हाल
कहीं मैदान नहीं तो कहीं शारीरिक शिक्षक नहीं होने से खेल प्रतिभाएं संघर्ष से जूझ रही हैं।
कोटा। हाड़ौती के राजकीय महाविद्यालयों में खेल व शारीरिक शिक्षा बुरे हालातों से गुजर रही है। सरकार की उपेक्षा से प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। हालात यह है कि कोटा संभाग में कुल 52 सरकारी कॉलेज हैं। जिसमें से 51 कॉलेजों में पीटीआई ही नहीं है। वहीं, कई महाविद्यालय तो ऐसे हैं जहां खेल मैदान तो दूर खुद का भवन तक नहीं है। गत वर्ष खुले नए राजसेस कॉलेज स्कूलों के कुछेक कमरों में चल रहे हैं। ऐसे हालातों में खेल प्रतिभाएं संघर्ष से जूझ रही हैं। जबकि स्पोर्ट्स, विद्यार्थियों का कॅरियर बना सकता है। इसके बावजूद हालात सुधारने की दिशा में कोई प्रयास हो रहे।
संभाग में एक ही पीटीआई, अगले साल होंगे रिटायर्ड
हाल ही में सेवानिवृत हुए कॉलेज शिक्षा कोटा के क्षेत्रिय सहायक निदेशक विजय पंचौली के अनुसार, संभाग के बारां, बूंदी, कोटा व झालावाड़ जिले में कुल 52 राजकीय महाविद्यालय है। जिनमें से 31 नियमित तथा 21 राजसेस हैं। इनमें केवल एक ही राजकीय महाविद्यालय बारां में ही सरकारी पीटीआई हैं, जिनका रिटायरमेंट वर्ष 2027 में है। सरकारी कॉलेजों में वर्ष 1992 के बाद से ही पीटीआई की भर्ती नहीं हुई। हर साल भर्ती की आस में बड़ी संख्या में युवा बीपीएड की डिग्री ले रहे हैं।
कोटा विश्वविद्यालय द्वारा हर साल स्पोर्ट्स कैलंडर जारी किया जाता है। जिसके तहत 4 माह तक अंतर महाविद्यालय गेम्स कॉम्पिटीशन होता है। छात्र पीटीआई के अभाव में वंचित हो जाते हैं। न तो पे्रक्टिस करवाने वाला कोई है और न ही खेल मैदान है। वर्तमान में राजकीय कला महाविद्यालय अब नवीन भवन में संचालित है, जहां खेल मैदान नहीं है।
-रिद्धम शर्मा, छात्रनेता एनएसयूआई
विद्यार्थी गेम्स की बारीकियां नहीं सीख पाते। कई छात्र स्पोट्स में कॅरियर बनाना चाहते हैं लेकिन स्पोट्स टीचर के अभाव में पिछड़ जाते हैं। यदि स्थाई पीटीआई मिले तो विद्यार्थी अंतर महाविद्यालय, अंतर राज्य विवि तथा नेशनल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कॉलेज का नाम रोशन कर सकते हैं।
-आशीष मीणा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष,गवर्नमेंट साइंस कॉलेज
हमारे पास न तो पीटीआई है और न ही खेल मैदान, जबकि, कैम्पस में पर्याप्त जगह है, जहां ग्राउंड बन सकता है। हम स्पोर्ट्स में कॅरियर बनाना चाहते हैं, मौका ही नहीं मिलता। खेल सप्ताह के नाम पर चम्मच दौड़ व कुर्सी दौड़ करवाकर इतिश्री कर ली जाती है।
-दिव्यांशी मुराड़िया, महानगर सह मंत्री, एबीवीपी रामपुरा कॉलेज
खिलाड़ी होने के नाते हमारे लिए बिना पीटीआई कॉलेज में अभ्यास करना बहुत मुश्किल हो गया है। बिना कोच के हमें न तो सही गाइडेंस मिल पा रही और न ही गेम्स की बारीकियां व टेक्निक सीख पा रहें। सरकार को जल्द स्पोट्स टीचर नियुक्त करना चाहिए।
- चित्रांश कंवर, छात्रा राजकीय महाविद्यालय कोटा
इंटर स्टेट प्रतियोगिताओं में प्रोफेशली तरीके से गेम्स खेले जाते हैं, जहां हम पिछड़ जाते हैं। स्पोट्स में कॅरियर बनाना चाहता हूं, लेकिन विड़म्बना है कि स्थाई पीटीआई नहीं है। स्पोट्स के स्तर को सुधारने के लिए सरकार कदम उठाए।
-विनीत नागर, छात्र राजकीय महाविद्यालय कोटा
इनका कहना है
लंबे समय से सरकारी कॉलेजों में पीटीआई नहीं हैं। बारां गवर्नमेंट कॉलेज में ही एकमात्र शारीरिक शिक्षक है। बिना स्पोट्स टीचर के बच्चों व कॉलेज प्रशासन को दिक्कत आती है। हालांकि, सरकार आरपीएससी के माध्यम से भर्ती निकाली थी, जिनके इंटरव्यू चल रहे हैं, जल्द ही कॉलेजों को नियमित शारीरिक शिक्षक मिलेंगे।
-डॉ. विजय पंचौली, पूर्व क्षेत्रिय सहायक निदेशक कोटा आयुक्तालय
सरकार, स्पोट्स को लगातार बढ़ावा दे रही है। साधन-संसाधन, उपकरण व खेल मैदान विकसित करने के लिए बजट भी दे रही है। वहीं, आरपीएससी के माध्यम से शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा के इंटरव्यू चल रहे हैं, इसके पूरे होने पर कॉलेजों को नियमित पीटीआई मिलेंगे।
-प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कोटा आयुक्तालय

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