सांप मारने को लाठी पीट रहे, वह भी आधी अधूरी
अवैध निर्माण व फायर सेफ्टी पर नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई
एक बार फिर नोटिस देकर की इतिश्री-हादसों के कुछ दिन तक ही नजर आती है अधिकारियों की सक्रियता।
कोटा। केस एक : जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में एक तीन मंजिला रेस्टोरेंट के ढहने से दो लोगों की मौत के बाद नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आया। अवैध निर्माण के नोटिस भी दिए गए। लेकिन उसके बाद केडीए ने तो किसी के भी खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई तक नहीं की। जबकि निगम ने की चार अवैध निर्माण भवनों को सीज करने के बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं की।
केस दो : रेस्टोरेंट हादसे के बाद नगर निगम का फायर अनुभाग भी सक्रिय हुआ। फायर टीम ने नए कोटा शहर के कोचिंग इलाकों में तीन से चार दिन तक तो अभियान चलाकर करीब डेढ़ सौ से अधिक नोटिस जारी किए। लेकिन उसके बाद उन नोटिसों की पालना हुई या नहीं। किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्कूल हादसे के बाद भी चेते थे अधिकारी: इसी तरह बरसात के समय में झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की छत ढहने से कई बच्चों की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद सरकार व प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आया। आनन-फानन में सभी जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया गया। उनमें बच्चों को बैठने से रोका गया। सरकार ने जर्जर स्कूल भवनों के लिए बजट भी पारित कर दिया। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। अभी तक भी किसी स्कूल की मरम्मत तक नहीं हुई है। ये तो उदाहरण मात्र हैं उस स्थिति को बताने के लिए जो कुछ दिन पहले शहर में उत्पन्न हुई थी। हालत यह है कि हर बार किसी भी तरह का बड़ा हादसा होने के बाद प्रशासन उस समय या कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आता है लेकिन उसके बाद फिर वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति हो जाती है।
केडीए ने दिए सौ से अधिक नोटिस
रेस्टोरेंट हादसा होने के बाद जांच में पता चला कि जो रेस्टोरेंट ध्वस्त हुआ था उसका निर्माण अवैध था। उसके पास के अन्य 5 भवन भी अवैध निर्माण की बुनियाद पर खड़े हुए थे। उसे देखते हुए कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से नए कोटा शहर के कोचिंग एरिया जवाहर नगर, इंद्र विहार, तलवंडी, महावीर नगर, के अलावा कुन्हाड़ी लैंड मार्क और बोरखेड़ा स्थित नयानोहरा समेत कई जगह पर बहुमंजिला इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किए। जानकारी के अनुसार करीब 100 से 125 नोटिस जारी किए। लेकिन उन नोटिसों को देने के बाद उन पर आगे क्या कार्रवाई की गई। इस बारे में कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार ही नहीं है।
अग्नि सुरक्षा नहीं होने पर दिए नोटिस
इसी तरह नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से हॉस्टलों व रेस्टोरेंट समेत अन्य बहुमंजिला उमारतों में आग से सुरक्षा की जांच की गई। उनमें से कहीं फायर सिस्टम नहीं था तो कहीं कार्यशील अवस्था में नहीं थे। कहीं आग से सुरक्षा के नाम पर मात्र दिखावे के छोटे उपकरण रखे हुए थे। ऐसे में नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से अभियान चलाकर करीब 150 से अधिक नोटिस दिए गए। उन नोटिसों के बाद उनकी पालना हुई या नहीं। भवन मालिकों ने फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए या नहीं। इसकी कोई जानकारी अभी तक नहीं है।
फिर किसी हादसे का इंतजार
शहर में किसी तरह का हादसा होने के कुछ दिन बाद तक तो सभी विभाग व जिला प्रशासन सक्रिय रहता है। फिर चाहे संभागीय आयुक्त हो या जिला कलक्टर। सभी ने बैठकें लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं हो। इसके लिए जो भी संभव हो कार्रवाई की जाए। अधिकारियों के निर्देश के बाद संबंधित विभाग हरकत में आए और कुछ दिन तक ऐसा लगा मानो अब शहर में ऐसी कार्रवाई होगी जिससे अवैध निर्माण व अतिक्रमण करने वालों को सबक मिलेगा। जबकि ऐसा लगता है कि प्रशासन व संबंधित विभाग फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद ही सख्त कार्रवाई होगी।
17 दिन हुए हादसे को
दिल्ली स्पाइसी रेस्टोरेंट को ध्वस्त हुए 17 दिन का समय हो गया है। 8 फरवरी की रात को हुए हादसे में एक कोचिंग छात्र व एक युवक की मौत हो गई थी। जबकि एक महिला के मलबे में दबने से उनका पैर इतना जख्मी हो गया था कि उसे काटना ही पड़ा। विभागीय व भवन मालिकों की लापरवाही का खामियाया बेगुनाहों को भुगतना पड़ रहा है।
इनका कहना है
इंद्र विहार में जिस रेस्टोरेंट का अवैध निर्माण था। उस समेत आस-पास के 5 भवनों को नोटिस दिया गया था। जिनमें से एक जर्जर भवन के मालिक ने तो स्वयं ही उसे ढहा दिया था। जबकि अन्य 4 को सीज कर दिया है। वहीं फायर के नोटिसों की पालना करवाई जाएगी। पालना नहीं करने वालों के खिलाफ निर्धारित समय के बाद कार्रवाई की जाएगी।
- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त, नगर निगम कोटा

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