बिना डॉक्टर चल रहे पशु चिकित्सालय, जानें पूरा मामला
पशु चिकित्सालयों पर न ही आवश्यक दवाइयां
बिगड़ा ढर्रा: कोटा सहित प्रदेशभर में चिकित्सक व स्टाफ के पद रिक्त।
कोटा। पशुपालन विभाग में स्टाफ संकट अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालने लगा है। पूरे प्रदेश में विभाग में 9 हजार से अधिक पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, जिसके चलते जिले सहित सैकड़ों पशु चिकित्सालय बिना पशु चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। कई केंद्रों पर तो हालात ऐसे हैं कि एक पशुधन सहायक या कंपाउंडर के भरोसे पूरा अस्पताल चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पशुपालन ग्रामीण क्षेत्रों की आय का प्रमुख साधन है, लेकिन समय पर इलाज, टीकाकरण और तकनीकी सलाह के अभाव में दुग्ध उत्पादन में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में स्थापित पशु चिकित्सालयों पर न तो नियमित पशु चिकित्सक हैं और न ही आवश्यक दवाइयां।
कहीं पद रिक्त तो कहीं पर लटका ताला
जिले के चेचट कस्बे में स्थित ए श्रेणी के पशु चिकित्सालय की हालत संतोषजनक नहीं है। यहां स्वीकृत पांच पदों में से दो पद रिक्त हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण यहां नियमित सेवाएं बाधित हो रही हैं। अस्पताल का संचालन सहायक कर्मचारियों के भरोसे किया जा रहा है, जिससे गंभीर बीमार पशुओं का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा। इधर कुंदनपुर ग्राम पंचायत के मंडीता गांव में बना पशु चिकित्सा उपकेंद्र बीते दो वर्षों से बंद पड़ा है। भवन तैयार होने के बावजूद आज तक यहां चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते उपकेंद्र पर ताला लटका हुआ है, जबकि आसपास के सात से आठ गांवों के पशुपालक इसी केंद्र पर निर्भर थे। रामगंजमंडी क्षेत्र के पशु चिकित्सालय में संसाधनों की कमी के चलते सीमित इलाज ही हो पा रहा है। विभाग द्वारा स्वीकृत पदों के बावजूद चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने से स्टाफ पर अतिरिक्त भार है।
निजी चिकित्सकों से उपचार करवाने की मजबूरी
जिले में पशुपालन विभाग की हालत चिंताजनक बनी हुई है। पशुपालकों की संख्या बड़ी होने के बावजूद पशुओं के उपचार, टीकाकरण और आपात सेवाओं के लिए न तो पर्याप्त पशु चिकित्सक उपलब्ध हैं और न ही कई स्थानों पर अस्पतालों के लिए भवन। संसाधनों की भारी कमी के चलते पशुपालकों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिले के कई उपखंडों में पशु चिकित्सालय कागजों में तो संचालित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कहीं चिकित्सक नहीं हैं तो कहीं भवन जर्जर या बंद पड़े हैं। परिणामस्वरूप पशुपालकों को बीमार पशुओं को निजी चिकित्सकों या दूर-दराज के शहरों में ले जाने को मजबूर होना पड़ता है। इस दौरान समय और पैसा दोनों खर्च होता है, फिर भी कई बार पशु को बचाया नहीं जा पाता।
पशुपालन विभाग में पदों की स्थिति
पदनाम स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त
पशु चिकित्सक: 4,800 2,100 2,700
पशुधन सहायक: 6,500 4,200 2,300
पैरावेट / कंपाउंडर: 3,200 1,900 1,300
तकनीकी व प्रशासनिक स्टाफ: 2,100 1,400 700
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पशु चिकित्सालयों में रिक्त पदों से परेशानी होती है। जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरा जाए, बंद पड़े उपकेंद्रों को चालू किया जाए और दवाइयों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
- भवानीशंकर गुर्जर, पशुपालक
इस साल पशुपालन विभाग में छह हजार पशु परिचर, 2800 पशुधन निरीक्षक और 2200 चिकित्सकों के पदों पर भर्ती होगी। इस सम्बंध में प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति बेहतर हो जाएगी।
- डॉ. सुरेश कुमार, निदेशक, पशुपालन निदेशालय

Comment List