ये कैसे इंतजाम! बनने के 34 माह बाद भी मदर मिल्क बैंक नहीं हो पाया शुरू

पौने तीन साल से बंद पड़ा कोटा का मदर मिल्क बैंक, शुरू होने का इंतजार

ये कैसे इंतजाम! बनने के 34 माह बाद भी मदर मिल्क बैंक नहीं हो पाया शुरू

कुपोषित व बिन मां के बच्चों की मां के दूध के इंतजार में पथराई आंखें।

कोटा। संभाग के सबसे बड़े जेकेलोन अस्पताल में पौने तीन साल से मदर मिल्क बैंक बनकर तैयार पड़ा है। सरी मशीने लग गई स्टाफ को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका उसके बावजूद अभी तक शुरू नहीं होने से 84 लाख से अधिक से तैयार भवन का उपयोग नहीं हो रहा । इसका खामीयाजा कुपोषित बच्चों को उठाना पड़ रहा है। जेकेलोन अस्पताल प्रशासन के ढीली कार्य शैली कारण कुपोषित व बिन मां के बच्चों को दूध के लिए आंख पथरा गई है। मदर मिल्क बैंक भवन बनकर तैयार हुए 34 माह से अधिक हो गए उसके बावजूद अभी शुरू नहीं हो का। इस दौरान तीन अधीक्षक तक बदल गए लेकिन मदर मिल्क बैंक ताले अभी तक खूले नहीं है।

धूल फांक रहे उपकरण 
मदर मिल्क बैंक के भवन को हस्तांतरित किए करीब 24 माह से अधिक हो गया है, जिसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है । इधर बंद पड़ा भवन मरीजों के परिजनों के कपड़े सुखाने के काम आ रहा है।  वहीं उपकरण अंदर पड़े पडे धूल फांक रहे है। उल्लेखनीय है कि 84 लाख की लागत से तैयार भवन में एसी से लेकर बाकी सभी सुविधाएं लग गई लेकिन इसको शुरू नहीं किया जा रहा है। पौने तीन साल से बेसब्री से इसके शुरू होने इंतजार कर रहे नौनिहालों इंतजार कब खत्म होगा ये यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

अस्थाई मदर मिल्क बैंक मूर्तरूप लेता तो आज उसे चले तीन साल हो जाते
जेके लोन मातृ एवं शिशु अस्पताल में मार्च 2021 में अस्पताल के दो कमरों में अस्थाई मदर मिल्क बैंक शुरू करने की कवायद शुरू की थी। अप्रैल 2021 में दो कमरे और किचन बनकर तैयार भी हो गया था।  इसकी शुरुआत अप्रैल 2021 में करनी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण से अंतरराष्टÑीय विमान सेवाएं बंद होने से मदर मिल्क के लिए आवश्यक मशीनें कोटा नहीं पहुंच सकी। जिससे  मदर मिल्क बैंक मूर्तरूप नहीं ले सका । अगर उस समय ये अस्थाई मदर मिल्क मूर्तरूप ले लेता तो 34 माह का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता 22 अप्रैल 2022 को भवन बन गया था उसमें यह मशीन शिफ्ट हो जाती और बच्चों को मां के दूध से वंचित नहीं रहना पड़ा। 

नवजात बच्चों को कुपोषण से बचाने का लंबा हो रहा इंतजार
बालपोषण संस्थाओं के अनुसार जन्म के आधे घंटे के भीतर मां का पहला दूध बच्चे के लिए पीना जरूरी है, लेकिन किसी कारणवश देश में 95 प्रतिशत बच्चों को यह दूध नहीं मिल पाता। यही वजह है कि भारत में हर दूसरा बच्चा कुपोषित है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कोटा में मदर मिल्क बैंक तैयार करने की कवायद की लेकिन अस्पताल प्रशासन इसको लेकर अभी तक गंभीर नजर नहीं आ रहा है। इसका खामियाजा नवजात शिशुओं को उठाना पड़ रहा है। ये मदर मिल्क बैंक शुरू हो जाता तो नवजात (0-1 साल) बच्चों को कुपोषित होने और दूध के अभाव में मौत के मुंह में समाने से रोका जा सकता है। 

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रोज मिलेगा एक दर्जन बच्चों को लाभ
जेकेलोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि प्रसूताएं एक दिन में तीन बार दूध दान कर सकेंगी। यह मिल्क बैंक उन नवजात शिशुओं के लिए वरदान साबित होगा, जिनकी मां नहीं हैं या जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पा रहा है।  इस बैंक से प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक नवजात शिशुओं को लाभ मिलेगा और उन्हें पोषक मां का दूध उपलब्ध कराया जा सकेगा। मदर्स मिल्क बैंक बनने के बाद कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश तक के नवजात शिशुओं और उनके परिजनों को फायदा मिलेगा। हालांकि, दूध दान करने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य की पूरी जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें कोई बीमारी न हो। मदर्स मिल्क बैंक नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध स्टोर करने और वितरित करने वाली एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है। इन बैंकों में स्वेच्छा से दूध दान किया जाता है, जिससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराया जा सके।

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34 माह में कभी उपकरण तो कभी स्टॉफ की कमी की बताई समस्या
जेकेलोन अस्पताल पिछले 34 माह से कभी उपकरण तो कभी स्टॉफ नहीं होने तो कभी प्रशिक्षण के नाम पर मदर मिल्क बैंक के संचालन को टाल रहा जिससे कपोषित बच्चों को मां का दूध नहीं मिल पा रहा है। 84 लाख लागत से भवन बनकर तैयार हो गया। कई भामाशाहों ने मशीने भी लगवाई। भवन में कुर्सी, एसी और अन्य उपकरण लगाए भी एक साल से अधिक हो गया। लेकिन हर बार शुरू करने का आश्वासन ही मिलता है। मदर मिल्क चालू नहीं होने से  मासूमों का इंतजार लंबा हो रहा है। 22 अप्रैल 2022 को भवन बनकर तैयार हो गया।  पौने साल इसके शुरू होने का  इंतजार इंतजार ही किया जा रहा है।  
- अब्दूल हामीद गौड़, सर्वोदय नेता 

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इनका कहना है
जेकेलोन अस्पताल में मदर मिल्क बैंक में सारे आवश्यक उपकरण लग गए है। शिशुरोग विभाग के स्टॉफ को इसके संचालन का प्रशिक्षण व मशीने चलाने बारे प्रशिक्षण दिया जा चुका है। शिशुरोग विभाध्यक्ष को इसको शुरू करने के लिए निर्देश दिए है। 4 मार्च को इसको शुरू करने के लिए कहा है। 
- डॉ. निर्मला शर्मा,  अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा

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