चम्बल के तीर बिना नीर- सूखे कण्ठ से यात्रा की मजबूरी
यात्री भार हो रहा लगातार कम
संजय नगर रोडवेज बस स्टैण्ड यात्री सुविधाओं के नाम पर फिसड्डी।
कोटा। संजय नगर स्थित रोडवेज बस स्टैण्ड जिसे शहर का आधुनिक बस अड्डा कहा जाता है, आज यात्री सुविधाओं के नाम पर बदहाली की मिसाल बन चुका है। 22.76 लाख लीज किराया देने वाला यह परिसर सुविधाओं के नाम पर धेला तक खर्च नहीं करता । वर्ष 2013 से संचालित यह बस स्टैण्ड अब मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। यात्रियों का कहना है कि आधुनिक और भव्य भवन होने के बावजूद यदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हों, तो ऐसी व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह जाता। सबसे चिंताजनक स्थिति पेयजल व्यवस्था की है, जो पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। कोटा शहर जिसे देशभर में 24 घन्टे पेयजल की आपूर्ति के लिये जाना जाता है उस शहर में रोडवेज के उपयोगकतार्ओं को यहां के दयनीय हालात पर गुस्सा आना लाजमी है।
नल टूटे, कनेक्शन कटे, प्याऊ अलमारी बन गये
बस स्टैण्ड भवन पोर्च एरिया में बनी प्याऊ में एक भी नल नहीं है। इस प्याऊ के तो कनेक्शन तक हटा दिए गए हैं। जिस स्थान पर यात्रियों को पानी पीना चाहिए, वहां सफाई कर्मचारियों ने झाड़ू और अन्य सामान रख दिया है।प्रबंधन का तर्क है कि इस प्याऊ में पानी चालू करने पर सेनेटरी लाइन चौक हो जाती है, जिससे बरामदे में पानी भर जाता है। हालांकि प्रबंधन मरम्मत का आश्वासन दे रहा है, लेकिन फिलहाल यात्रियों को तत्काल राहत का कोई रास्ता नहीं निकाला जा रहा है।
दो अन्य प्याऊ भी लेकिन पानी सिर्फ एक नल से
मंदिर के पास स्थित एक अन्य प्याऊ पर 80 लीटर का वाटर कूलर रखा हुआ है, लेकिन उसका बिजली व पानी का कनेक्शन कटा हुआ है। दूसरा, बस स्टैण्ड के प्रवेश द्वार के पास एक संस्था द्वारा संचालित प्याऊ ही किसी तरह चालू है। यहां भी दो में से एक नल टूटा हुआ है, जबकि दूसरे में भी टंकियां चोक होने से पानी का प्रेशर नहीं है । पूरे बस स्टैण्ड की जलापूर्ति इसी एक नल पर निर्भर है। गर्मी के मौसम में जब यात्रियों की संख्या और पानी की जरूरत बढ़ जाती है, तब यह व्यवस्था नाकाफी साबित होगी ।
पीना तो दूर हाथ धोने तक के लिए खरीदना पड़ रहा पानी
प्रतिदिन कईं यात्री इस बस स्टैण्ड से आवागमन करते हैं। पानी की सुविधा न होने के कारण उन्हें मजबूरन बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है ।निगम की तरफ से हाथ धोने तक का पानी नहीं मुहैय्या नहीं कराया जा रहा। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है। कई यात्रियों ने बताया कि बस का इंतजार करते समय प्यास लगने पर उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।
सबसे बड़े अधिकारी का कार्यालय फिर भी यह हाल
सबसे हैरानी की बात यह है कि इसी बस स्टैण्ड परिसर में रोडवेज के वरिष्ठ अधिकारी का कार्यालय भी स्थित है। इसके बावजूद यात्री सुविधाओं की यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दशार्ती है। यही नहीं कोटा आगार का पूरा मेनेजमेंन्ट स्टाफ इसी परिसर में ड्यूटी बजाता है। ऐसे में भी यहां रोड़वेज की छवि को खराब करने वाली यह दुर्दशा पर किसी का ध्यान ना जाना प्रशासनिक अधिकारियों की असंवेदनशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है
राजस्व और छवि पर भी असर
सुविधाओं की लगातार कमी के कारण बस स्टैण्ड का राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। खराब अनुभव के चलते कई यात्री निजी वाहनों या अन्य साधनों को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसी कारण यहां से यात्री भार लगातार कम होता जा रहा है। वर्तमान में ड़िपो की कुल आय का मात्र 2 प्रतिशत से भी कम यहां से प्राप्त होती है।
मै स्वयं संजय नगर रहता हूँ लेकिन इस बस स्टैण्ड़ पर सुविधाओं के नाम कोई जिम्मेदार नहीं इसलिये कोई यात्री परिवार के साथ आना पसन्द नहीं करता, टेक्सी लेकर नयापुरा जाना बेहतर है।
- गोविन्द सिंह गौड़, निवासी संजय नगर
हमारी संस्था द्वारा एक पक्की प्याऊ लगायी गयी है, जिसे जन सुविधा की दृष्टि से हम देख्रेख भी करवा रहे है, इसे 2 दिनों साफ सफाई करवाकर चालू करवा देंगे ।
- महावीर नागर , कोषाघ्यक्ष श्री धरणीधर जनसेवा संस्थान
मेरी जानकारी में आया है इसके लिये एक टीम बनवाकर शीघ्र ही निस्तारण करवा दिया जायेगा।
- अजय कुमार मीणा मुख्य प्रबंधक कोटा आगार

Comment List