रक्तदाता दिवस विशेष : 'टीम जीवनदाता' से जुड़े 5 हजार से अधिक युवा, देश भर में मिल चुके हैं 1000 से अधिक सम्मान
भुवनेश शर्मा अब तक 189 बार कर चुके हैं रक्तदान
कोटा। किसी के लिए रक्तदान महज कुछ मिनटों की प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन जरूरतमंद मरीज के लिए यही कुछ मिनट जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन जाते हैं। अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की उम्मीद लगाए बैठे मरीज और उसके परिजनों के लिए रक्त की एक यूनिट भी किसी वरदान से कम नहीं होती। इसी जीवनदायिनी सेवा को अपने जीवन का ध्येय बना चुके हैं कोटा के भुवनेश शर्मा।
करीब तीन दशक से अधिक समय से रक्तदान और रक्तसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भुवनेश शर्मा का सफर एक पारिवारिक अनुभव से शुरू हुआ था, जो आज हजारों युवाओं को समाजसेवा से जोड़ने का माध्यम बन चुका है। उनका एकमात्र संकल्प है—'रक्त के अभाव में किसी की जान नहीं जानी चाहिए।'
मां की बीमारी ने खोलीं आंखें, डॉक्टर की प्रेरणा से बदला जीवन
भुवनेश शर्मा के रक्तसेवा अभियान की शुरुआत किसी योजना से नहीं, बल्कि परिवार पर आए संकट से हुई। वर्ष 1994 में उनकी माताजी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एमबीएस अस्पताल भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने रक्त की आवश्यकता बताई। अस्पताल में रक्त के लिए मरीजों की जद्दोजहद देखकर वे स्तब्ध रह गए। वहां मौजूद एक चिकित्सक ने उन्हें रक्तदान के महत्व से अवगत कराया, जिसका उनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने 19 वर्ष की उम्र में पहली बार रक्तदान किया। आज 51 वर्ष की आयु में भी उनका यह संकल्प अटूट है।
189 बार रक्तदान और एसडीपी, गांव-गांव फैलाई जागरूकता
भुवनेश शर्मा अब तक 189 बार रक्तदान और एसडीपी दान कर चुके हैं। उनकी यह प्रतिबद्धता केवल स्वयं तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान शिविरों, रैलियों और जागरूकता अभियानों के जरिए भ्रांतियों को दूर करने का काम किया। उनका मानना है कि रक्तदान व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
'टीम जीवनदाता' से जुड़ा 5 हजार युवाओं का कारवां
रक्तसेवा को संगठित रूप देने के लिए भुवनेश ने 15 साल पहले 'टीम जीवनदाता' का गठन किया। आज इस संस्था के संस्थापक के रूप में वे 5000 से अधिक युवाओं और समाजसेवियों के कारवां का नेतृत्व कर रहे हैं। किसी भी मरीज को आपात स्थिति में समय पर रक्त उपलब्ध कराना इस टीम की प्राथमिकता है।
उपराष्ट्रपति अवार्ड सहित 1000 से अधिक सम्मान
रक्तदान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें चेन्नई, दिल्ली, अहमदाबाद और जयपुर सहित देश भर में 1000 से अधिक सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें प्रतिष्ठित उपराष्ट्रपति अवार्ड भी शामिल है। भुवनेश शर्मा कहते हैं कि सम्मान प्रोत्साहन तो देते हैं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि किसी मरीज की जान बचाकर उसके परिवार के चेहरे पर आई मुस्कान देखना है।

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