सुविवि: कुलपति ने बढ़ाई छुट्टी, 40 दिन में तीसरा कार्यवाहक
सुखाड़िया विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार 40 दिनों में तीन कार्यवाहक
उदयपुर। सुखाड़िया विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार 40 दिनों में तीन कार्यवाहक कुलपति बनाए गए हैं। इस बार कॉमर्स कॉलेज के डीन प्रो.पीके सिंह को यह जिम्मा सौंपा दिया है, क्योंकि कुलपति प्रो. अमेरिकासिंह ने 10 जून तक अवकाश ले लिया है। कुलपति प्रो. सिंह ने पहली बार कुलाधिपति को अवकाश लेने के कारणों का उल्लेख करते हुए प्रो. पीके सिंह को कार्यवाहक कुलपति बनाने की सूचना दी है। कुलपति प्रो. सिंह ने सोमवार को राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा कि ‘वे हृदय रोगी हैं। दो बार स्टंट लग चुके हैं। चिकित्सकों ने बेड रेस्ट करने और यात्रा नहीं करने का परामर्श दिया है। इस अवधि में प्रो. पीके सिंह जिम्मेदारी संभालेंगे। विशेष परिस्थितियों में प्रो. सिंह आॅनलाइन या मौखिक स्वीकृति देंगे।’ इस जानकारी रजिस्ट्रार सीआर देवासी को नहीं दी गई, जबकि विवि के परीक्षा, प्रवेश और अन्य मामलों में कई नीतिगत निर्णय के लिए रजिस्ट्रार उनके लौटने के इंतजार में हैं।
कमेटी दे सकती है अंतिम मौका
योग्यता जांच मामले में संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी कुलपति प्रो. सिंह अंतिम मौका दे सकती है। सूत्रों की मानें तो कमेटी सदस्यों ने लखनऊ से प्रो.सिंह की योग्यता एवं सेवा संबंधित दस्तावेज जुटा लिए हैं तथा उनका मूल्यांकन भी कर लिया गया है। इसके चलते कुलपति प्रो. सिंह को उनका पक्ष रखने के लिए अंतिम अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया जा रहा है, ताकि रिपोर्ट में उनका पक्ष भी शामिल किया जा सके।
नाराज छात्रसंघ अध्यक्ष बोला, सस्पेंड करो
इधर, सुविवि के पूर्व केंद्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष निखिलराज सिंह ने सोमवार को रजिस्ट्रार सीआर देवासी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की कि वे प्रो.सिंह को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड करें क्योंकि वे 40 दिनों से अवकाश पर है और नियम विरुद्ध जाकर कार्यवाहक कुलपति बना रहे हैं। ऐसे में तुरंत प्रभाव से प्रो. सिंह को हटाकर विवि संविधान के अनुसार नए कुलपति की नियुक्ति होनी चाहिए।
यह है मामला
कुलपति प्रो. सिंह पर सीकर के गुरुकुल विवि के भौतिक सत्यापन में गलत रिपोर्ट पेश करने का आरोप है। साथ ही उन पर आरोप है कि उनकी योग्यता नहीं होने के बावजूद वे कुलपति बने हंै। इसका आधार उनके द्वारा प्रस्तुत भ्रामक व झूठे दस्तावेज प्रस्तुत करना है। इसके अलावा महिला प्रोफेसरों के साथ भी अभद्रता का आरोप है जिसकी शिकायत राजभवन में की गई है।

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