फिल्म निर्माण के नाम पर 44 करोड़ ठगी का मामला : विक्रम भट्ट को हाईकोर्ट से झटका, एफआईआर निरस्त से इनकार
200 करोड़ रुपए की कमाई का भरोसा
बॉलीवुड फिल्म निमार्ता विक्रम भट्ट को राजस्थान हाईकोर्ट से भी बड़ी झटका लगा। हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी और करोड़ों रुपए की कथित आर्थिक हेराफेरी से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने करीब 18 पन्नों के आदेश में स्पष्ट कहा कि प्रथमदृष्टया यह मामला सिर्फ अनुबंध उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विश्वासघात, छल और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आते।
उदयपुर। बॉलीवुड फिल्म निमार्ता विक्रम भट्ट को राजस्थान हाईकोर्ट से भी बड़ी झटका लगा है। हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी और करोड़ों रुपए की कथित आर्थिक हेराफेरी से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने करीब 18 पन्नों के आदेश में स्पष्ट कहा कि प्रथमदृष्टया यह मामला सिर्फ अनुबंध उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विश्वासघात, छल और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं। मामला उदयपुर के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. अजय मुर्डिया की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने एक एंटरटेनमेंट कंपनी की शुरूआत की थी। शिकायत के अनुसार उदयपुर के दिनेश कटारिया ने बॉलीवुड में अपनी कथित पहुंच का दावा करते डॉ. मुर्डिया को फिल्म निर्माण में निवेश के लिए प्रेरित किया। इसके बाद विक्रम और उनके सहयोगियों ने चार फिल्मों के निर्माण का प्रस्ताव रखकर उनसे लगभग 44.29 करोड़ रुपए प्राप्त किए और बदले में करीब 200 करोड़ रुपए की कमाई का भरोसा दिलाया।
बढ़ती गई रुपए की मांग
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिल्म निर्माण के दौरान विक्रम भट्ट ने पत्नी श्वेतांबरी भट्ट सहित अन्य लोगों को प्रोजेक्ट में शामिल किया। तय बजट मिलने के बावजूद बार-बार अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाती रही। आरोप है कि दो फिल्मों का निर्माण किया गया, एक फिल्म की शूटिंग बीच में ही छोड़ दी गई, जबकि चौथी फिल्म की शूटिंग शुरू तक नहीं हुई।
भुगतान रोका तो धमकियां, 30 करोड़ की हेराफेरी
डॉ. मुर्डिया का आरोप है कि जब उन्होंने आगे भुगतान करने से इनकार किया, तो फिल्म निर्माण से जुड़ी मशीनरी और सामग्री जब्त कर उन्हें बेचने की धमकियां दी गईं। संदेह गहराने पर कराई गई आंतरिक जांच में यह सामने आया कि वेंडर्स को अधिक भुगतान दिखाकर करीब 30 करोड़ रुपए की कथित हेराफेरी सामने आई। इसके बाद भूपालपुरा पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस स्तर पर एफआईआर को रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।

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