सूरत की फैक्ट्रियों से बचपन मुक्त : साड़ी पर धागा वर्क और मशीनें चलाते मिले 92 नौनिहाल, मजदूरी सिर्फ 5 हजार

रेस्क्यू अधिकांश बच्चे स्कूल ड्रॉपआउट

सूरत की फैक्ट्रियों से बचपन मुक्त : साड़ी पर धागा वर्क और मशीनें चलाते मिले 92 नौनिहाल, मजदूरी सिर्फ 5 हजार
आदिवासी अंचलों से गुजरात मजदूरी के लिए ले जाए गए मासूमों के खिलाफ हो रहे शोषण का बड़ा खुलासा। उदयपुर की मानव तस्करी निरोधी यूनिट और राज्य बाल आयोग की टीम ने बुधवार को गुजरात के सूरत में एक संयुक्त मेगा ऑपरेशन चलाकर 92 नौनिहालों को रेस्क्यू।

उदयपुर। जिले के आदिवासी अंचलों से गुजरात मजदूरी के लिए ले जाए गए मासूमों के खिलाफ हो रहे शोषण का बड़ा खुलासा हुआ है। उदयपुर की मानव तस्करी निरोधी यूनिट और राज्य बाल आयोग की टीम ने बुधवार को गुजरात के सूरत में एक संयुक्त मेगा ऑपरेशन चलाकर 92 नौनिहालों को रेस्क्यू किया। ये सभी बच्चे उदयपुर के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के रहने वाले हैं, जिन्हें बेहतर जीवन का झांसा देकर मजदूरी के दलदल में धकेल दिया गया था। रेस्क्यू किए गए बच्चों की उम्र महज 7 से 14 वर्ष के बीच है। जांच में सामने आया कि सूरत के टेक्सटाइल मार्केट से जुड़ी छोटी-छोटी यूनिट्स में इन बच्चों से साड़ियों पर धागे का वर्क करवाया जा रहा था। कुछ मासूमों को खतरनाक मशीनें चलाने के काम में भी लगाया गया था। इन बच्चों को इस भारी काम के बदले प्रति माह केवल 5 से 8 हजार रुपए ही दिए जा रहे थे।

6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
राज्य बाल आयोग के पूर्व सदस्य शैलेंद्र पंड्या ने बताया कि पिछले एक महीने से सूचना मिल रही थी कि उदयपुर के गरीब बच्चों को सूरत ले जाकर उनसे बाल श्रम करवाया जा रहा है। इस जानकारी पर 20 सदस्यीय टीम ने एक गुप्त कार्ययोजना बनाई और बुधवार को सूरत के पूना थाना इलाके में सीताराम सोसाइटी और मुक्तिधाम सोसाइटी सहित करीब 6 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। रेस्क्यू किए गए अधिकांश बच्चे स्कूल ड्रॉपआउट हैं। गरीबी और जागरूकता के अभाव में ये बच्चे कुछ महीने पहले ही सूरत काम की तलाश में पहुंचे थे। ऑपरेशन के दौरान जब टीम वहां पहुंची तो मासूमों की स्थिति देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। छोटी-छोटी कोठरियों में इन बच्चों से दिन-रात काम लिया जा रहा था।

दोषियों पर शिकंजा और पुनर्वास की तैयारी
मानव तस्करी निरोधी यूनिट अब उन फैक्ट्री संचालकों और बिचौलियों से पूछताछ कर रही है, जो इन बच्चों को राजस्थान से गुजरात लेकर आए थे। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में बच्चों के परिजनों से भी बातचीत की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि उन्हें किन परिस्थितियों में वहां भेजा गया था। उल्लेखनीय है कि साल 2019 में भी राज्य बाल आयोग ने सूरत में इसी तरह की बड़ी कार्रवाई कर कई बच्चों को मुक्त करवाया था। उदयपुर के आदिवासी क्षेत्रों से बच्चों का पलायन और बाल श्रम की समस्या एक बार फिर गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। रेस्क्यू किए गए बच्चों को अब बाल गृह भेजा जा रहा है, जहां से काउंसलिंग के बाद उन्हें उनके घर पहुचाया जाएगा।  

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