जयपुर मंडल का कीर्तिमान: एक साथ दो नॉन-इंटरलॉकिंग कार्यों की सफल कमीशनिंग
जयपुर-फुलेरा रेलखंड पर तकनीकी सुधार पूर्ण
उत्तर पश्चिम रेलवे ने जयपुर-फुलेरा खंड पर कनकपुरा यार्ड री-मॉडलिंग और हिरनोदा साइडिंग का कार्य समय से पहले पूरा कर इतिहास रचा है। नई इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली से मालगाड़ियों का संचालन सुगम होगा और शंटिंग समय में कमी आएगी। इस आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से लॉजिस्टिक क्षमता और रेल सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल ने रेल संचालन को अधिक सुरक्षित, तीव्र और दक्ष बनाने की दिशा में बड़ा कीर्तिमान स्थापित करते हुए जयपुर-फुलेरा डबल लाइन रेलखंड पर दो महत्वपूर्ण नॉन-इंटरलॉकिंग कार्यों को एक साथ निर्धारित समय से पहले सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। यह उपलब्धि मंडल की तकनीकी दक्षता, समन्वय और सुनियोजित कार्यप्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार कनकपुरा स्टेशन पर यार्ड री-मॉडलिंग और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इसके तहत लाइन संख्या 4 और 3 के मध्य तथा लाइन संख्या 2 से जुड़े शंटिंग नेक के साथ इमरजेंसी क्रॉसओवर स्थापित किया गया और दो नए शंट सिग्नल चालू किए गए।
इस व्यवस्था से डाउन दिशा से आने वाली मालगाड़ियों को सीधे लाइन 1, 2 और 3 में लिया जा सकेगा, जिससे मुख्य लाइन यातायात प्रभावित हुए बिना शंटिंग और पावर रिवर्सल संभव होगा। इससे टर्मिनल डिटेंशन में कमी आएगी और मालगाड़ियों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी। समानांतर रूप से हिरनोदा यार्ड में एचपीसीएसएल ड्राई पोर्ट साइडिंग का कमीशनिंग भी सफलतापूर्वक किया गया। परियोजना के अंतर्गत इमरजेंसी क्रॉसओवर, दो ट्रैप पॉइंट्स और दो नए शंट सिग्नल स्थापित किए गए, जिससे ड्राई पोर्ट को सुरक्षित और निर्बाध रेल संपर्क मिला है। इससे क्षेत्र में लॉजिस्टिक सुविधाओं का विस्तार और माल परिवहन को नई गति मिलने की उम्मीद है। मेगा ब्लॉक के दौरान शैडो प्लानिंग के तहत जयपुर यार्ड में सिग्नलिंग से जुड़े कार्य भी पूर्ण किए गए।

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