सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए खेजड़ी कटाई पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- तकनीक के नाम पर प्रकृति विनाश नहीं
पश्चिमी राजस्थान में खेजड़ी सहित अन्य पेड़ों को अंधाधुंध काटा
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए खेजड़ी पेड़ों की कटाई पर गंभीर चिंता जताते कहा है कि तकनीकी विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश मानवता के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा।
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए खेजड़ी पेड़ों की कटाई पर गंभीर चिंता जताते कहा है कि तकनीकी विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश मानवता के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा गठित समिति को सुझाव दिया कि वह ऐसा समाधान तलाशे जिससे एक भी खेजड़ी का पेड़ काटने की नौबत न आए। न्यायाधीश अरुण मोंगा और न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने श्री जांभेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा प्रदेश संस्था द्वारा दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते कहा कि समिति किसी भी पेड़ को और काटे जाने से रोकने और ऐसे किसी भी कार्य की अनुमति न देने के लिए हर संभव विकल्प तलाशेगी, जिससे कोई ऐसा नुकसान हो जो कभी ठीक न हो सके। याचिकाकर्ता संस्था ने आरोप लगाया था कि राज्य की सौर ऊर्जा नीति के तहत बड़े पैमाने पर सोलर प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं, जिनके लिए पश्चिमी राजस्थान में खेजड़ी सहित अन्य पेड़ों को अंधाधुंध काटा जा रहा है।
याचिका में कहा गया कि जिस भूमि पर परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं वह अधिकांशत: बंजर है और खेजड़ी ही ऐसी प्रजाति है जो रेगिस्तानी परिस्थितियों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखती है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि उसने 9 मार्च 2026 को खेजड़ी संरक्षण के लिए संभावित कानून का मसौदा तैयार करने के लिए विशेष समिति गठित कर दी है। समिति विभिन्न राज्यों के वृक्ष संरक्षण कानूनों का अध्ययन कर सुझाव देगी।

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