विश्व जूनोसिस दिवस : पशुओं से 100 से ज्यादा बीमारियों का खतरा, मनुष्य को एक चूक पड़ सकती है भारी

कच्चा दूध और संक्रमित पशुओं के संपर्क में बरतें पूरी सावधानी

विश्व जूनोसिस दिवस : पशुओं से 100 से ज्यादा बीमारियों का खतरा, मनुष्य को एक चूक पड़ सकती है भारी
पशुओं की सेवा करने वाले ही कई बार उन्हीं से मिलने वाले संक्रमण का शिकार। उदयपुर के पशुपालन विभाग में गत वर्षों में एक डॉक्टर सहित 25 से अधिक कर्मचारी और पशुधन सहायक ब्रूसेलोसिस जैसी गंभीर जूनोटिक बीमारी की चपेट में आ चुके। अधिकांश मामलों में संक्रमण गायों के गर्भपात के दौरान भ्रूण और संक्रमित द्रव के सीधे संपर्क से फैला।

उदयपुर। पशुओं की सेवा करने वाले ही कई बार उन्हीं से मिलने वाले संक्रमण का शिकार बन जाते हैं। उदयपुर के पशुपालन विभाग मे ं गत वर्षों में एक डॉक्टर सहित 25 से अधिक कर्मचारी और पशुधन सहायक ब्रूसेलोसिस जैसी गंभीर जूनोटिक बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। अधिकांश मामलों में संक्रमण गायों के गर्भपात (अबॉर्शन) के दौरान भ्रूण और संक्रमित द्रव के सीधे संपर्क से फैला। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में होने वाले लगभग 60 प्रतिशत संक्रामक रोग पशुओं से मनुष्यों में फैलते हैं, जबकि उभरने वाले नए संक्रामक रोगों में करीब 75 प्रतिशत की उत्पत्ति भी पशुओं से होती है। रेबीज, ब्रूसेलोसिस, बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, लेप्टोस्पाइरोसिस, एंथ्रेक्स, निपाह और ईबोला जैसी बीमारियां इसी श्रेणी में आती हैं।चेटक स्थित बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय के अधिकारियों के अनुसार संक्रमित गायों में गर्भावस्था के अंतिम महीनों में गर्भपात होने की आशंका रहती है। ऐसे पशुओं का गर्भपात कराने या मृत भ्रूण को बाहर निकालने के दौरान यदि दस्ताने, मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग नहीं किया जाए तो संक्रमण त्वचा या शरीर के अन्य माध्यमों से मनुष्य में पहुंच सकता है।

संक्रमित कर्मचारियों में लंबे समय तक बार-बार बुखार आना, अत्यधिक थकान और शरीर दर्द जैसे लक्षण देखे गए। कच्चा दूध भी गंभीर संक्रमणों का कारक:विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रूसेलोसिस के अलावा कच्चा दूध भी कई गंभीर संक्रमणों का कारण बन सकता है। इसलिए दूध को हमेशा अच्छी तरह उबालकर ही उपयोग करना चाहिए। पशुओं का नियमित टीकाकरण, साफ-सफाई, बीमार पशुओं को अलग रखना तथा जैविक अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना संक्रमण की रोकथाम के लिए बेहद जरूरी है।

 इनका कहना है
पशुपालकों और पशुधन सहायकों को विशेष रूप से गाय और बकरी के गर्भपात का निस्तारण करते समय पूरी सुरक्षा अपनानी चाहिए। रेबीज से बचने के लिए श्वान के काटते ही इंजेक्शन लगवाना चाहिए। पशुपालन, डेयरी, मांस उद्योग, प्रयोगशालाओं और चिड़ियाघरों से जुड़े लोगों में जूनोसिस का जोखिम सबसे अधिक होता है। दूध उबाल कर पीएं। जागरूकता और सावधानी ही इसका सबसे प्रभावी बचाव है।
-डॉ. सुरेश जैन
अति.निदेशक, बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय 

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