होर्मुज संकट: यूएई पर 300 मिसाइल और 1600 ड्रोन हमले; ब्रिक्स को खुद बर्बाद कर रहा ईरान, भारत पर बना रहा दबाव
ईरान के भीषण हमलों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रहार
ईरान ने 550 मिसाइलों से इजरायल और 298 से यूएई पर हमला कर युद्ध तेज कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य ब्लॉक होने से 20% तेल आपूर्ति बाधित हुई और उर्वरक लागत 30% तक बढ़ गई। हालांकि, भारत ने खरीफ 2026 के लिए पर्याप्त उर्वरक स्टॉक सुनिश्चित कर अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के ठोस कदम उठाए हैं।
अबूधाबी। ईरान ने 28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायल पर करीब 550 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। ईरान ने इजरायल पर करीब 1000 ड्रोन भी दागे हैं। जबकि इजरायल से उसका सीधा युद्ध चल रहा है। दूसरी तरफ ईरान ने अभी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर 298 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं और 1600 ड्रोन हमले किए हैं। यानि, इजरायल से करीब 200 मिसाइल हमले ही कम यूएई पर किए गए हैं जबकि करीब 600 ड्रोन ज्यादा यूएई पर दागे गए हैं। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद सऊदी अरब पर सिर्फ 34 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है और करीब 150 ड्रोन हमले किए हैं।
ब्रिक्स के आर्थिक सहयोग का सपना क्या टूट जाएगा?
ईरान ने मार्च की शुरूआत से ही जहाजों पर हमले करके होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया है। जिससे 1000 से ज्यादा जहाजों की आवाजाही में देरी हुई है या उन्हें दूसरे रास्ते से गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस जलडमरूमध्य से आम तौर पर दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल, एलएनजी, उर्वरक, अनाज और अन्य सामानों को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में भेजा जाता है। ईरान के इस कदम से तेल और गैस की कीमतें आसमान छू गईं हैं टैंकरों का किराया तेजी से बढ़ा है। शिपिंग कंपनियों ने जहाजों को केप आॅफ गुड होप के रास्ते से भेजना शुरू कर दिया जिससे गंतव्य तक समाना पहुंचने में 10 से 14 दिनों की देरी हो रही है।
भारत के लिए जो ब्रिक्स का एक अहम सदस्य है उसकी अर्थव्यवस्था के लिए ये देरी नुकसान पहुंचाने वाला है। उर्वरक बाजार इस व्यवधान से परेशान है। गैस की कीमतों में भारी उछाल और शिपिंग में देरी की वजह से वैश्विक स्तर पर उर्वरक की लागत लगभग 20-30 प्रतिशत तक बढ़ गई। हालांकि भारत ने घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इस प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि खरीफ 2026 के मौसम से पहले उर्वरक का पर्याप्त भंडार मौजूद है और यूरिया का स्टॉक पिछले साल की तुलना में अधिक है।

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