यूक्रेन में एक और भारतीय की मौत रूसी सेना ने जबरन भेजा था लड़ने

पुतिन ने तोड़ा पीएम मोदी से किया वादा

यूक्रेन में एक और भारतीय की मौत रूसी सेना ने जबरन भेजा था लड़ने
नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने भी कहा था कि मॉस्को इस मुद्दे का शीघ्रतम संभव समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है।

कीव। यूक्रेन में रूस की तरफ से भेजे गए हरियाणा के एक 22 वर्षीय युवक की मौत हुई है। मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने रवि मौन (22) की मौत की पुष्टि की है। रवि के परिजनों का दावा है कि उसे धोखा देकर रूस की तरफ से लड़ने के लिए भेजा गया था। साल 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन में ये पांचवें भारतीय की मौत हुई है।

हाल ही में पीएम मोदी की मॉस्को यात्रा के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली से वादा किया था कि यूक्रेन में रूसी सेना के लिए काम कर रहे सभी भारतीयों को मुक्त कर दिया जाएगा और उनकी वापसी की व्यवस्था की जाएगी। लेकिन रवि की मौत के बाद ये साबित हो गया है कि रूसी सेना अभी भी यूक्रेन में भारतीयों की तैनाती किए हुए है।

ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर भेजा गया था रूस
रवि के भाई अजय मौन ने दावा किया है कि वह इसी साल 13 मई को रूस गया था। एक एजेंट ने उसे ट्रांसपोर्टेशन की नौकरी के लिए रूस भेजा था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद सेना में शामिल कर लिया गया। अजय मोहन ने 21 जुलाई को अपने भाई के बारे में पता लगाने के लिए लिखा था। दूतावास ने बताया कि रवि की मौत हो गई है। भारतीय दूतावास ने शव की पहचान के लिए परिजनों से डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट मांगी है। अजय मोहन ने यह भी दावा किया कि रूसी सेना ने उनके भाई से कहा था कि वह मोर्चे पर यूक्रेनी सेना के खिलाफ लड़ने जाए या फिर 10 साल की जेल के लिए तैयार रहे। रवि को खाई खोदने के लिए ट्रेनिंग दी गई थी और बाद में उसे मोर्चे पर भेज दिया गया। रवि 12 मार्च तक अपने परिवार के संपर्क में रहा था। भारतीय दूतावास की तरफ से रवि के भाई को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि रूस ने मौत की पुष्टि की है। हालांकि, शव की पहचान के लिए उन्हें करीबी परिजन से डीएनए टेस्ट की जरूरत होगी। परिजनों ने शव वापस लाने के लिए पीएम मोदी से गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि शव लाने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। परिजनों ने रवि को भेजने के लिए एक एकड़ जमीन बेचकर 11.50 लाख रुपए खर्च किए गए थे।

रूस के लिए लड़ रहे कई भारतीय
दर्जनों भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में गैर-लड़ाकू नौकरियों या नागरिक क्षेत्र में रोजगार का वादा करके यूक्रेन में भेज दिया गया है। कहा जाता है कि कई ऐसे भी हैं जिन्हें कथित तौर पर वीजा नियमों में उल्लंघन करने के बाद रूस में गिरफ्तार किया गया और कहा गया कि उन्हें एक साल के लिए सेना में सेवा देनी होगी या दस साल जेल में बिताने होंगे। इसी जुलाई की शुरूआत में मॉस्को यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन के सामने यूक्रेन में भारतीयों को भेजे जाने का मुद्दा उठाया था। उस समय पुतिन ने भरोसा दिया था कि भारतीयों को इससे अलग किया जाएगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रूसी पक्ष ने सभी भारतीयों को जल्द छोड़े जाने का वादा किया है। 

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नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने भी कहा था कि मॉस्को इस मुद्दे का शीघ्रतम संभव समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है।

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