साल 2026 में भारत के ऐतिहासिक सोलर मिशन के अलावा अंतरिक्ष में दिखेगी रिंग ऑफ फायर, चंद्रग्रहण और सुपरमून के साथ उल्कापिंडों की बारिश
आदित्य-एल1 और सौर गतिविधियों का निर्णायक साल
2026 खगोल विज्ञान के लिए खास रहेगा। साल की शुरुआत सुपरमून से होगी। फरवरी में वलयाकार सूर्यग्रहण का रिंग ऑफ फायर दिखेगा। अगस्त में पूर्ण सूर्यग्रहण, मार्च में ब्लड मून, तीन सुपरमून और आदित्य-एल1 का अहम चरण वैज्ञानिकों की उत्सुकता बढ़ाएगा। दुर्लभ घटनाएं दुनिया भर में देखी जाएंगी। भरपूर
वॉशिंगटन। पूरी दुनिया साल 2026 के स्वागत के लिए तैयार है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर लोग नए साल का स्वागत करेंगे। वहीं, दुनियाभर के खगोलविदों के लिए आने वाला साल कुछ खास होगा, जो कई दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का दीदार कराने वाला है। साल की शुरूआत सुपरमून से होगी तो दूसरे महीने में सूर्य ग्रहण के दौरान रिंग ऑफ फायर का दुर्लभ नजारा होगा। इसके साथ ही यह साल एस्ट्रोनॉट के लिए बहुत खास होने वाला है और 50 सालों में सबसे ज्यादा अंतरिक्षयात्रियों को अपनी ओर खींचेगा। साल के दूसरे हिस्से में एक पूर्ण सूर्यग्रहण को लेकर खगोल वैज्ञानिकों में उत्सुकता बनी हुई है। साथ ही भारत का आदित्य-एल1 इस वर्ष अपने सबसे अहम चरण में प्रवेश करेगा।
सूर्य ग्रहण और रिंग ऑफ फायर
साल 2026 में 17 फरवरी को एक वलयाकार सूर्यग्रहण होने जा रहा है। इस दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा के आने से सूरज एक चमकीली अंगूठी के रूप में दिखाई देता है। इसे रिंग आॅफ फायर के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, इसे अंटार्कटिका में कुछ रिसर्च स्टेशन से ही अच्छी तरह देखा जा सकेगा। 12 अगस्त को एक पूर्ण सूर्यग्रहण होने जा रहा है, जो आर्कटिक में शुरू होगा और ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन से होकर गुजरेगा। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को ढक लेगा जिससे 2 मिनट 18 सेकंड तक आसमान में अंधेरा छा जाएगा।
चंद्र ग्रहण और ब्लडमून
साल का पहला चंद्रग्रहण रिंग ऑफ फायर सूर्यग्रहण के दो सप्ताह बाद 3 मार्च को होने जा रहा है। यह एक पूर्ण चंद्रग्रहण होगा जिसे ब्लड मून कहा जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा की सतह 58 मिनट तक लाल रंग की चमकेगी। इससे पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र से सबसे अच्छे से देखा जा सकेगा। साल का आखिरी ग्रहण एक आंशिक चंद्रग्रहण होगा। 28 अगस्त को चंद्रमा की सतह का 96% हिस्सा लाल हो जाएगा, लेकिन पूरी तरह से ग्रहण नहीं लेगा। इस दौरान पृथ्वी की छाया के किनारे को चंद्रमा की सतह को पार करते हुए देखना शानदार अनुभव होगा।
सुपरमून
साल 2026 में तीन सुपरमून अपनी अद्भुत चमक से आसमान को रोशन करेंगे। यह तब होता है जब पूर्णिमा का चांद अपनी कक्षा में घूमते हुए पृथ्वी के ज्यादा करीब आ जाता है। इन सुपरमून के खास नजारे को देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती। इन्हें आप अपनी आंखों से ही देख सकते हैं। साल पहला सुपरमून जनवरी में उल्कापिंडों की बारिश के साथ होगा। दूसरा सुपरमून 24 नवम्बर को होगा, जबकि साल का आखिरी और सबसे करीबी सुपरमून 23 और 24 दिसम्बर की रात में होगा। उम्मीद है कि 2026 में सूरज में ज्यादा विस्फोट होंगे जिससे धरती पर जियोमैग्नेटिक तूफान आ सकते हैं, जिससे शानदार ऑरोरा दिखाई देगा।

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