ऑयल टैंकरों को कबाड़ में बदल देती हैं ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगें, ऐसी भारत के पास भी नहीं

होर्मुज की सुरंगें: ईरान की समुद्री शक्ति और ईएम-52 का खौफ

ऑयल टैंकरों को कबाड़ में बदल देती हैं ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगें, ऐसी भारत के पास भी नहीं

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में हजारों समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाकर वैश्विक जहाजरानी के लिए खतरा पैदा कर दिया है। चीन और रूस से प्राप्त ईएम-52 रॉकेट माइंस तेल टैंकरों को पल भर में डुबो सकती हैं। हालांकि अमेरिका ने कई माइनलेयर्स नष्ट किए हैं, लेकिन ईरान की यह अदृश्य मारक क्षमता युद्ध में उसे बड़ी बढ़त दिलाती है।

नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ये खबर आई कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगे बिछा दी हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी-इजरायली जहाजों को नुकसान पहुंचाया जा सके। हालांकि, अमेरिका ने भी कहा है कि उसने ईरान के माइनलेयर्स यानी समुद्री बारूदी सुरंगों को बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया है। हाल ही में उसने 16 माइनलेयर्स को नष्ट करने का दावा किया है। कहा जाता है कि इस तरह की बारूदी सुरंगें भारत के पास नहीं हैं। ईरान के पास कितनी ऐसी माइंस हैं, इसके आंकड़े तो कभी जारी नहीं किए गए हैं, मगर कई रिपोर्टों में यह आकलन किया गया है कि समुद्र की तलहटी में ईरान ने 2,000-6,000 ऐसी समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं।

ईरान के पास दो तरह की माइंस क्षमताएं: एक वेबसाइट अनुसार, ईरान के पास माइन लेइंग और माइन स्टॉक्स दोनों की ही क्षमता है। ईरान ने बरसों से पूर्व सोवियत संघ, पश्चिमी देशों के साथ इन माइंस के लिए कई करार किए थे। रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान ने ईएम-52 रॉकेट प्रोपेल्ड की खरीद की है। उसने चीन से इस तरह की कई माइन खरीदी हैं।

ईरान ने रूस-चीन, उत्तर कोरिया से हासिल की समुद्री बारूदी सुरंगें: अमेरिकी एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान के हथियार भंडार में कम से कम 2,000 ऐसी माइंस हैं। ईरान के पास बेहद नए, एडवांस माइंस हैं, जिसे उसने रूस, चीन और उत्तर कोरिया से हासिल किए थे। टैंकर युद्ध में समुद्री बारूदी सुरंगें ज्यादा कारगर: एक्सपर्ट का मानना है कि ईरान तेल टैंकरों की लड़ाई में समुद्री बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल करता है। पहले विश्वयुद्ध के दौरान से ही इन समुद्री बारूदी सुरंगों का खूब इस्तेमाल किया जाता रहा है। ये समुद्री बारूदी सुरंगें ईरान को  युद्ध में बढ़त दिला सकती हैं। खासतौर पर दुनिया की नस कही जाने वाली होर्मुज की खाड़ी में उसकी यह क्षमता बेहद कारगर है।

क्या होती हैं बेहद ताकतवर ईएम-52 माइंस

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जो जहाज ईएम-52 माइंस के ऊपर से गुजरते हैं, उनमें विस्फोट हो जाता है। यह इतना ताकतवर होता है कि पूरा का पूरा जहाज ही समंदर में डूब जाता है। समंदर की तली में यह माइन बिछाई जाती है। उस दौरान इसमें लगे सेंसर्र एक्टिव रहते हैं। जैसे ही कोई जहाज ऊपर से गुजरता है तो ये सटीक निशाना लगाकर रॉकेट मारते हैं। ये उन जहाजों में नीचे से रॉकेट बरसाकर उसे फाड़ देती हैं। ऐसे जहाजी तेल टैंकर तकरीबन डूब जाते हैं।

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क्या भारतीय नौसेना के पास ऐसी क्षमता है

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भारतीय नौसेना के पास पहले माइंस स्वीपर थे, जिनमें माइंस बिछाने की क्षमता थी। भारतीय नौसेना के पास फिलहाल माइन लेयर शिप नहीं हैं। हालांकि, नेवी के पास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (अरह-रहउ) हैं। इनमें जरूरत पड़ने पर माइन ले जाने और उसे बिछाने की क्षमता होती है।

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