जापान : प्रधानमंत्री ताकाइची ने संसद भंग की, आठ फरवरी को होंगे चुनाव
जापान में मध्यावधि चुनाव की घोषणा
प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने संसद भंग कर 8 फरवरी को मध्यावधि चुनाव की घोषणा की, लोकप्रियता के सहारे जनादेश लेने की कोशिश, बजट मंजूरी टलने की आशंका।
टोक्यो। जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने पदभार संभालने के केवल तीन महीने बाद शुक्रवार को संसद के निचले सदन 'डाइट' को भंग कर दिया है, जिससे आगामी आठ फरवरी को होने वाले मध्यावधि चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। ताकाइची ने यह कदम अपनी वर्तमान लोकप्रियता का लाभ उठाने और हाल के वर्षों में अपनी पार्टी को हुए नुकसान की भरपाई करने के उद्देश्य से उठाया है। हालांकि, इस फैसले के कारण अर्थव्यवस्था को गति देने और बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए तैयार किए गए महत्वपूर्ण बजट को मंजूरी मिलने में देरी होने की संभावना है। सदन भंग होने की घोषणा के बाद सांसदों ने पारंपरिक 'बान्जाई' के नारे लगाए और चुनाव अभियान की तैयारियों में जुट गए।
अक्टूबर में जापान की पहली महिला नेता के रूप में निर्वाचित होने वाली ताकाइची की लोकप्रियता रेटिंग लगभग 70 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर बनी हुई है। हालांकि, उनकी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) अभी भी भ्रष्टाचार के आरोपों और यूनिफिकेशन चर्च के साथ पुराने संबंधों के कारण चुनौतियों का सामना कर रही है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह अपनी राजनीतिक साख दांव पर लगा रही हैं और अब जनता को यह तय करना है कि उन्हें पद पर बने रहना चाहिए या नहीं। वह अपने पूर्ववर्ती शिगेरु इशिबा की तुलना में अधिक कट्टर रूढि़वादी रुख अपना रही हैं और सैन्य मजबूती तथा सख्त आप्रवासन नीतियों पर जोर दे रही हैं।
ताकाइची ने दक्षिणपंथी 'जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी) के साथ मिलकर एक नया गठबंधन बनाया है। यह बदलाव तब आया जब एलडीपी की पुरानी सहयोगी कोमेइतो पार्टी ने वैचारिक मतभेदों के कारण गठबंधन तोड़ दिया था। नए गठबंधन के तहत ताकाइची केवल पुरुषों के शाही उत्तराधिकार और परमाणु रिएक्टरों को फिर से शुरू करने जैसे लक्ष्यों पर आगे बढ़ रही हैं। दूसरी ओर, कोमेइतो ने विपक्षी कांस्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान के साथ मिलकर 'सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस' का गठन किया है। पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिको नोडा ने इस नए गठबंधन को समावेशी राजनीति और लोग पहले की नीति का एक अवसर बताया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताकाइची के ताइवान समर्थक बयानों के बाद चीन के साथ जापान के संबंधों में तनाव बढ़ गया है, जिससे चीन ने आर्थिक और राजनयिक जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी जापान पर अपनी रक्षा क्षमताओं पर अधिक खर्च करने के लिए दबाव बना रहे हैं।
ताकाइची का मानना है कि उन्हें अपनी नीतियों को लागू करने के लिए जनता के स्पष्ट जनादेश की आवश्यकता है। अब 12 दिनों का आधिकारिक चुनाव अभियान अगले मंगलवार से शुरू होगा, जिसमें ताकाइची अपनी निर्णायक छवि के दम पर बहुमत हासिल करने की कोशिश करेंगी।

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