सीआईए के इशारे पर यूएई पहुंचा सिराजुद्दीन हक्कानी, भड़का मुल्ला हैबतुल्लाह

सरकार में उनका ही निर्णय अंतिम माना जाता है

सीआईए के इशारे पर यूएई पहुंचा सिराजुद्दीन हक्कानी, भड़का मुल्ला हैबतुल्लाह
अखुंदजादा राजनीति से खुद को दूर रखे हुए है, हालांकि पूरी सरकार में उनका ही निर्णय अंतिम माना जाता है।

काबुल। अफगानिस्तान पर काबिज तालिबान के बीच घमासान मचा हुआ है। इस घमासान के दो मुख्य पक्ष तालिबान का सुप्रीम लीडर मौलाना हैबतुल्लाह अखुंदजादा और सिराजुद्दीन हक्कानी हैं। सिराजुद्दीन हक्कानी 2021 में काबुल पर कब्जे के बाद से ही तालिबान की अंतरिम सरकार में आंतरिक मंत्री है। पूरे अफगानिस्तान में हक्कानी की पकड़ सबसे ज्यादा मजबूत है। उसके पाकिस्तान और इस्लामिक स्टेट से भी अच्छे संबंध हैं। वहीं, अखुंदजादा राजनीति से खुद को दूर रखे हुए है, हालांकि पूरी सरकार में उनका ही निर्णय अंतिम माना जाता है।

हैबतुल्लाह ने हक्कानी को क्यों हटाया
आमज न्यूज को सूत्रों के अनुसार भाषण के बाद मुल्ला हैबतुल्लाह ने इस समूह के आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी को हटाने का फैसला किया है। दरअसल, हक्कानी हाल में ही यूएई की यात्रा पर गया था, जिसके बारे में मुल्ला हैबतुल्लाह को कोई जानकारी नहीं थी। सूत्रों ने बताया कि यह यात्रा हैबतुल्लाह के समन्वय के बिना हुई और उसे इसके बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। हक्कानी के साथ समूह के खुफिया प्रमुख अब्दुलहक वसीक भी यूएई गया था, जिसने हैबतुल्लाह को कोई सूचना नहीं दी थी।

सीआईए से मिला हुआ है अखुंदजादा
अब हैबतुल्लाह को पता चला है कि सिराजुद्दीन हक्कानी की यूएई की इस खुफिया यात्रा का समन्वय अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने किया था। सीआईए ने हक्कानी को गारंटी दी है कि वह उसके हितों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेगा। यह गारंटी तब दी गई है, जब हक्कानी अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के टॉप मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट में शामिल है। ऐसे में हैबतुल्लाह को यह शक है कि हक्कानी और सीआईए में कोई सीक्रेट डील हुई है, जो तालिबान के खिलाफ है। पहले से भी मुल्ला हैबतुल्लाह और हक्कानी के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं। दोनों पक्ष क्षेत्रीय साझेदारों की तलाश भी कर रहे हैं।

तालिबान में शुरू होगा गृह युद्ध
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मुल्ला हैबतुल्लाह हक्कानी को बर्खास्त करने की कोशिश करता है, तो यह संभावित रूप से तालिबान के भीतर गृह युद्ध शुरू कर सकता है। आखिरकार, हक्कानी युद्ध में अनुभवी है, अब पाकिस्तान पर बहुत अधिक निर्भर नहीं हैं, जबकि पाकिस्तान में अभी भी उनकी पकड़ है, और अभी भी अल-कायदा जैसे अन्य क्षेत्रीय समूहों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए हुए हैं। ऐसा निर्णय अखुंदजादा के लिए बहुत दर्दनाक हो सकता है।

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