संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर हो सकती है ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक, पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की संभावना

युद्धविराम अब प्रभावी नहीं

संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर हो सकती है ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक, पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की संभावना
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर न्यूयॉर्क में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित होने की संभावना है। रूस के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर अलिमोव के अनुसार इस पर विचार जारी है। इस दौरान तनावपूर्ण पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सकती है।

मॉस्को। अमेरिका के न्यूयॉर्क में आठ सितंबर से होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की एक अलग बैठक हो सकती है, जिसमें पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा होने की संभावना है। रूस के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर अलिमोव ने न्यूयॉर्क में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक होने की संभावना से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए बताया, "इस मुद्दे पर फिलहाल चर्चा की जा रही है।" रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया के हालात इस बातचीत के सबसे कठिन विषयों में से एक हो सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मतभेदों के कारण ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की पिछली बैठक किसी साझा बयान के बिना ही समाप्त हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा का नया सत्र पारंपरिक रूप से सितंबर में शुरू होता है। इसी परंपरा में 81वां सत्र आठ सितंबर से शुरू होने वाला है। इसस पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आठ जुलाई को घोषणा की थी कि 18 जून को ईरान के साथ हुआ युद्धविराम अब प्रभावी नहीं है। उसी दिन अमेरिकी सेना ने ईरान पर कई हमले किए, जो लगातार कई दिनों तक चलता रहा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया था कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों के खिलाफ ईरान की कार्रवाइयों के जवाब में थे।

ईरानी ने अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पश्चिमी एशिया में स्थित कई अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किये। बाद में ट्रम्प ने घोषणा की कि कूटनीति को मौका देने के लिए उन्होंने ईरान पर योजनाबद्ध हमलों को रद्द कर दिया है। उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स की स्थापना 2006 में एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में हुई थी। शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। बाद में 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) इसके सदस्य बने, जबकि 2025 में इंडोनेशिया ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बन गया।

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

करतारपुर गलियारा खोलने की मांग : भारत-पाकिस्तान सीमा पर अरदास, श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा दरबार साहिब में नतमस्तक होने का अवसर उपलब्ध कराना मकसद करतारपुर गलियारा खोलने की मांग : भारत-पाकिस्तान सीमा पर अरदास, श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा दरबार साहिब में नतमस्तक होने का अवसर उपलब्ध कराना मकसद
गलियारा जल्द खोलने की मांग को लेकर सोमवार को भारत-पाकिस्तान सीमा की जीरो लाइन पर सिख संगत सामूहिक अरदास करेगी।...
निकाय चुनाव में कांग्रेस की गुटबाजी पड़ी भारी : सामूहिक प्रचार से दूरी, बड़े नेता अपने गढ़ तक सिमटे
हलका बनेगा नई बीट पुलिसिंग की धुरी : थाना क्षेत्र अब क्लस्टर में बंटेंगे, पुरानी व्यवस्था में सीधे बीट आवंटन
छोटी घटनाओं को गंभीरता से लें डीएम-एसपी, लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी: सीएम योगी
हम भारत के लोग का संदेश : जयपुर में निकली लोकमंथन यात्रा, दिया कुमारी ने यात्रा को किया रवाना
जूली का आरोप : गुंडागर्दी पर उतरी भाजपा, पार्षदों की चोरी करने का कर रहे प्रयास
खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर Congress का केंद्र पर ​तीखा प्रहार: गरीब-मध्यम वर्ग की कमर तोड़ रही महंगाई, सरकार से आम जनता को राहत देने की मांग