हलका बनेगा नई बीट पुलिसिंग की धुरी : थाना क्षेत्र अब क्लस्टर में बंटेंगे, पुरानी व्यवस्था में सीधे बीट आवंटन
डिजिटल निगरानी बढ़ाना उद्देश्य
जयपुर। राजस्थान पुलिस की बीट व्यवस्था अब पुराने ढर्रे से निकलकर हलका यानी क्लस्टर आधारित प्रणाली की ओर बढ़ रही है। नई व्यवस्था में किसी थाने के पूरे क्षेत्र को सीधे अलग-अलग बीटों में बांटने के बजाय पहले उसे छोटे-छोटे हलकों (क्लस्टर) में विभाजित किया जाएगा। सामान्य तौर पर एक हलके में 3 से 5 बीट होंगी और हर हलके का प्रभारी एसआई/एएसआई स्तर का अधिकारी होगा। हर बीट में एफसी-एचसी स्तर के बीट अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने का प्रस्ताव है।
डिजिटल निगरानी बढ़ाना उद्देश्य
इस बदलाव का मकसद बीट कर्मचारी को अपने क्षेत्र से लगातार जोड़ना, उसकी जिम्मेदारी स्पष्ट करना और बीट पुलिसिंग को कागजी रिकॉर्ड से निकालकर डिजिटल निगरानी से जोड़ना है। नई व्यवस्था में बीट अधिकारी का काम केवल गश्त तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि जांच, वारंट तामील, गिरफ्तारी, फर्स्ट रिस्पॉन्डर, गश्त, नाकाबंदी, सूचना संकलन और सामुदायिक पुलिसिंग तक उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
कागज से राजकॉप तक पहुंचेगी बीट बुक
नई व्यवस्था में बीट बुक को राजकॉप ऐप की ई-बीट बुक में बदला जा रहा है। इसमें बीट अधिकारी की जीपीएस लोकेशन और रूट हिस्ट्री दर्ज करने की व्यवस्था है। 112 कंट्रोल रूम से मिलने वाली घटना की सूचना संबंधित थाने के साथ बीट प्रभारी तक भेजी जा सकेगी। घटनास्थल की फोटो जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प के साथ अपलोड करने तथा क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की जानकारी मैप पर दर्ज करने का प्रावधान है। ई-बीट बुक में नागरिक और आपराधिक दोनों तरह का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।
नई व्यवस्था से क्या होंगे लाभ
- कौन अधिकारी किस क्षेत्र के लिए जिम्मेदार है, यह स्पष्ट होगा।
- पुलिस को क्षेत्र में ज्यादा समय मिलेगा।
- अपराध की रोकथाम में मदद मिलेगी।
- लाइव निगरानी होगी।
- नागरिकों का डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा।
- आपात सूचना तेजी से बीट तक पहुंचेगी।
- आगे का रोडमैप
इन 9 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट
समिति की रिपोर्ट में नई बीट प्रणाली के पायलट प्रोजेक्ट के लिए ये नौ जिले शामिल हैं। रिपोर्ट के इन 9 पायलट जिलों में 671 हलकों के भीतर 5185 बीट गठित की जा चुकी हैं।
पुरानी व्यवस्था में क्या था
24 जनवरी 2019 के स्थाई आदेश के तहत लागू व्यवस्था में थाना क्षेत्र को स्वीकृत पुलिस नफरी के अनुसार ग्राम पंचायत या शहरी वार्ड के आधार पर बीटों में बांटा जाता है। थाने के हर कांस्टेबल, महिला कांस्टेबल को एक बीट संभालने की जिम्मेदारी दी जाती है। तीन-चार बीट के समूह पर एसआई/एएसआई, हेड कांस्टेबल को बीट प्रभारी बनाया जाता है। बीट कांस्टेबल का कार्यकाल दो वर्ष और बीट प्रभारी का एक वर्ष निर्धारित है।

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