निकाय चुनाव में कांग्रेस की गुटबाजी पड़ी भारी : सामूहिक प्रचार से दूरी, बड़े नेता अपने गढ़ तक सिमटे
जिलाध्यक्षों ने भी बनाई दूरी
जयपुर। निकाय चुनाव में कांग्रेस के पिछड़ने के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के बड़े नेता जहां अपने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों तक सीमित रहे, वहीं भाजपा के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ समेत कई नेताओं ने संयुक्त रूप से प्रचार और रोड शो किए। कांग्रेस नेताओं का एक धड़ा मान रहा है कि पार्टी को भी सामूहिक प्रचार की रणनीति अपनानी चाहिए थी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा लक्ष्मणगढ़, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जोधपुर, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली अलवर और सचिन पायलट टोंक क्षेत्र में अधिक सक्रिय रहे। कांग्रेस ने 309 निकायों में चुनाव अभियान का जिम्मा मुख्य रूप से स्थानीय नेताओं पर छोड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार प्रदेश से लेकर जिलों तक गुटबाजी का असर चुनाव में दिखाई दिया। कोटा, जयपुर, भीलवाड़ा और बीकानेर में टिकट वितरण और स्थानीय नेताओं के बीच खींचतान के मामले सामने आए। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भी हाल ही में कहा कि यदि सभी नेता एक साथ प्रचार करते और रोड शो का जवाब रोड शो से दिया जाता तो कांग्रेस की स्थिति बेहतर हो सकती थी। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने गुटबाजी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी ढाई साल से लगातार सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रही है।
जिलाध्यक्षों ने भी बनाई दूरी
संगठन सृजन अभियान के जरिए चुने जिलाध्यक्षों को लेकर राहुल गांधी ने बड़ा दावा कर कहा था कि जिलाध्यक्षों की विधायकों, सांसदों के टिकट वितरण में बड़ी भूमिका रहेगी, लेकिन निकाय चुनाव में पार्टी ने विधायक और विधायक प्रत्याशी को ही फ्री हैंड दिया। उसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्षों ने भी निकाय चुनाव में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब पार्टी के सामने पंचायत चुनाव हैं।
इन जिलों में कांग्रेस में गुटबाजी हावी
कोटा में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और प्रहलाद गुंजल के बीच अदावत नजर आई। टिकट वितरण के दौरान धारीवाल गुट ने गुंजल खेमे को दरकिनार किया था। जयपुर में हवामहल से कांग्रेस प्रत्याशी आरआर तिवाड़ी, मालवीय नगर से कांग्रेस प्रत्याशी रहीं अर्चना शर्मा और बगरू से कांग्रेस प्रत्याशी रही गंगा देवी के क्षेत्र में जीते विधायकों ने टिकट वितरण में दखल दिया था। इसके चलते नाराजगी खुलकर सामने आई थी। भीलवाड़ा नगर परिषद में गुटबाजी का असर दिखा। पूर्व राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर और कांग्रेस जिलाध्यक्ष व पूर्व मंत्री रामलाल जाट के बीच खींचतान की खबरें आई। बीकानेर में भले ही कांग्रेस इस बार बोर्ड बनाने की स्थिति में हो, लेकिन यहां पूर्व मंत्री बीडी कल्ला, गोविंदराम मेघवाल और रामेश्वर डूडी गुट के नेताओं के बीच कई बार खुलकर बयानबाजी हुई थी। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष मदन गोपाल से मारपीट तक हो गई थी।

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