घायल सैनिकों को नहीं बचा पा रहा यूक्रेन, खाने-पीने की भी कमी, रूस के कब्जे में बोला यूक्रेनी सैनिक
घायल सैनिकों को उनके हाल पर छोड़ रही सेना, भोजन की भारी कमी
रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी वीडियो में यूक्रेनी युद्धबंदी एलेक्जेंडर सोतनिवोक ने दावा किया कि यूक्रेनी सेना घायल सैनिकों को बचाने में विफल है, जिससे कई सैनिक रास्ते में ही दम तोड़ रहे हैं।
मॉस्को। यूक्रेन की सेना रूस के खिलाफ चल रहे युद्ध में अपने घायल सैनिकों को समय पर बचाने में असफल हो रही है, जिसकी वजह से कई सैनिक बिना इलाज के मर रहे हैं। रूस के कब्जे में मौजूद यूक्रेन के युद्धबंदी एलेक्जेंडर सोतनिवोक ने रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी वीडियो में यह दावा किया है।
सोतनिवोक ने सोमवार को जारी एक वीडियो में कहा, घायलों को लड़ाई वाले क्षेत्रों से निकालने में एक बड़ी समस्या आ रही है। अगर कोई सैनिक घायलों को ले जाने वाले ट्रक तक नहीं पहुंच पा रहा, तो उसका मरना तय है। यूक्रेनी सेना घायलों को तभी निकाल रही है, जब वह एक खास जगह पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दिमित्रोव की ओर पांच-दिन की यात्रा के दौरान उन्होंने कई मृतकों को देखा। एक सैनिक एक पेड़ से लगकर बैठा था। सोतनिवोक और उनके साथी सैनिक को लगा कि वह जिन्दा है, लेकिन वह मर चुका था। उन्होंने कहा कि वह शख्स युद्ध में घायल होने के बाद निकासी ङ्क्षबदु (ट्रक) तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन रास्ते में ही मर गया।
सोतनिकोव ने कहा कि उनका चार सैनिकों का समूह दिमित्रोव में युद्धक्षेत्र में पहुंचा, तो उनके ऊपर मोर्टार से हमला हो गया। इस हमले में दो सैनिक घायल हो गये। बचे हुए दोनों सैनिक जैसे-तैसे कुछ दूर चलकर एक घर में घुसे, जहां पहले से रूसी सैनिक मौजूद थे। उन्होंने वहां हथियार डालने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि यूक्रेनी सेना के पास खाने-पीने की चीजों की भी कमी है। कभी-कभी ड्रोन खाने का सामान युद्धक्षेत्र में पहुंचाते हैं, लेकिन उनमें भी नाश्ते की ही चीजें होती हैं।
सोतनिकोव ने कहा कि उनके पास कोई सैन्य अनुभव नहीं था, लेकिन यूक्रेन ने उन्हें जबरदस्ती सीमा पर भेज दिया। उन्होंने अफवाहें सुनी थीं कि भर्ती कार्यालय के स्टाफ 15-16 हजार डॉलर लेकर लोगों को रिहा कर रहे थे, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं थी। उन्होंने कहा,आप एक दरवाजे से निकलते हैं और फौरन ही दूसरे लोग आपको पकड़कर दूसरी दिशा में भेजने के लिये सेना में भर्ती करने आ जाते हैं।

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