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31 अक्टूबर : इतिहास, सियासत, प्रेम और कविता के चार पाठ

31 अक्टूबर : इतिहास, सियासत, प्रेम और कविता के चार पाठ कुछ तारीखें कैलेंडर में महज दर्ज होने के लिए नहीं आतीं। वे अपने भीतर इतिहास की धूल, राजनीति के रक्तचिह्न, प्रेम की स्याही और कविता की उदासी समेटे होती हैं। 31 अक्टूबर ऐसी ही एक तारीख है।
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